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Nov 22
ताजमहल, आज़म ख़ाँ और देश
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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ताजमहल किसका है? आज़म ख़ाँ कहते हैं, मुसलमानों का है, इसलिए ताजमहल पर वक़्फ़ वालों का हक़ है. नौ साल पहले भी यूपी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने ताजमहल को अपनी मिल्कियत बताया था. तब से मामला सुप्रीम कोर्ट में है. तो अब नौ साल बाद आज़म ख़ाँ क्यों फिर वही बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं. क्या यह असदुद्दीन उवैसी की पार्टी मजलिस इत्तेहादुल मुसलिमीन को रोकने की तैयारी है, जिसने उत्तर प्रदेश के अगले चुनाव में उतरने का एलान कर दिया है? क्या 'लव जिहाद' के बाद ताजमहल को चुनावी आग में झोंकने की व्यूह रचना की जा रही है?

रविवार, 23 नवम्बर को मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने पाठ्यक्रम में संस्कृत को अनिवार्य बनाने की माँग ख़ारिज कर दी है.

और 27 नवम्बर को दैनिक जागरण में छपी ख़बर के मुताबिक़ अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय के वीमेन्स कालेज की छात्राओं के लिए मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी अब से हर रविवार को अलग से खोली जायेगी. लाइब्रेरी सुबह 8-11 खुलेगी. छात्राओं को वहाँ तक पहुँचाने और वापस लाने के लिए अलग से एक बस का इन्तज़ाम किया गया है.

और 27 नवम्बर को ही बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर के लिए अपना 'विज़न डाक्यूमेंट' जारी किया, जिसमें अनुच्छेद 370 की कोई चर्चा नहीं है!

इस कालम को अब इसी सन्दर्भ में पढ़ें. यह कालम शनिवार 22 नवम्बर को छपा था. 

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
ताजमहल किसका है? देश में शिगूफ़ों की राजनीति के महानायकों में से एक जनाब आज़म ख़ाँ साहब ने अपने पिटारे में से झाड़-पोंछ कर एक पुराना फटीचर शोशा फिर से उछाला है! नौ साल पहले यह विवाद उठ चुका है. उठ कर सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच चुका है. उत्तर प्रदेश सुन्नी सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने तब ताजमहल पर अपना दावा ठोका था. ठीक यही बात कही थी, जो आज़म ख़ाँ साहब आज कह रहे हैं. यही कि ताजमहल दो मुसलमानों का मक़बरा है. वहाँ मुसलमानों की क़ब्रें हैं, इसलिए वक़्फ़ बोर्ड का ही हक़ उस पर बनता है. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया.

तब कहा था, ताजमहल तोड़ देंगे!

कहा जाता है कि जो सज्जन उस समय यूपी वक़्फ़ बोर्ड के मुखिया थे, वह आज़म ख़ाँ के क़रीबी माने जाते थे! और आज वही आज़म ख़ाँ उसी फुँके कारतूस को दुबारा दाग़ने की Raagdesh Tajmahal and Azam Khanकोशिश कर रहे हैं! क्यों? थोड़ी हैरानी होती है. ख़ास कर इसलिए कि अभी साल भर पहले ही ख़ाँ साहब यह कह रहे थे कि अगर बाबरी मसजिद के बजाय कोई भीड़ ताजमहल ध्वस्त करने के लिए निकलती तो वह ख़ुद उसका नेतृत्व करते! क्यों? क्योंकि ताजमहल जनता के पैसे के दुरुपयोग का नमूना है और 'शाहजहाँ को कोई हक़ नहीं था कि वह अपनी प्रेमिका की याद के लिए जनता के करोड़ों रुपये लुटा दे!' वाह ख़ाँ साहब वाह! कभी तो ताजमहल एक शहंशाह के सामन्ती शोषण का प्रतीक बन जाये और कभी वही मुसलमानों का मक़बरा बन जाये! क्या राजनीति है आपकी? (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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