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Nov 01
काले धन का टेंटुआ कोई क्यों पकड़े?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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तो सवाल यह है कि क्या काले धन को हम सही जगह ढूँढ भी रहे हैं या बस ढूँढते रहने का नाटक ही कर रहे हैं? काला धन क्या केवल विदेशी बैंकों में ही है? काला धन क्या देश में नहीं है? विदेश में काला पैसा पकड़ पाना इतना आसान नहीं है, यह बात बिलकुल साफ़ है! फिर भी चलिए, जब आप वहाँ से पकड़ पाइएगा, तो पकड़िएगा, लेकिन पहले तो आप यह बताइए कि देश में जमा काला धन पकड़ने के लिए पिछले छह महीनों में आपने क्या किया? आप कहेंगे कि पिछले 67 साल में किस सरकार ने क्या किया? आपका सवाल बिलकुल सही है. किसी ने कुछ नहीं किया. आपसे भी यह सवाल बिलकुल नहीं किया जाता, अगर आपने अपने चुनाव प्रचार में बड़े-बड़े दावे न किये होते!

यह आलेख 1 नवम्बर 2014 को छपा था. अगले दिन यानी 2 नवम्बर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी 'मन की बात' में कहा कि देश को उनके इस वादे पर भरोसा रखना चाहिए कि वह विदेश से काला धन वापस ला कर रहेंगे. देश को निस्सन्देह प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है कि वह विदेश से काला धन लाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे (बशर्ते कि काला धन अब भी वहाँ बचा हो). लेकिन सवाल यह है कि देश के भीतर छिपे काले धन को पकड़ने के सवाल पर वह बिलकुल चुप क्यों हैं? क्या मजबूरी है कि उन्होंने अब तक इस बारे में न कोई क़दम उठाया और न कभी कुछ कहा? यही इस आलेख का मूल विषय है.

--- क़मर वहीद नक़वी by: Qamar Waheed Naqvi सुना है, सरकार काला धन ढूँढ रही है. उम्मीद रखिए. एक न एक दिन काला धन आ कर रहेगा! अगर कहीं मिल जायेगा, तो ज़रूर आ जायेगा! न मिला तो सरकार क्या कर सकती है? उसका काम ढूँढना है, काले धन का पता लगाना है, सूँघना है कि काला धन किस विदेशी बिल (बैंक) में छिपा हो सकता है! सरकार सूँघ रही है. उसे गन्ध लग गयी तो सारा काला धन खींच लायेगी! लोग बेमतलब सरकार पर शक कर रहे हैं कि सरकार को साँप सूँघ गया! हो सकता है कि काले धन को ही साँप सूँघ गया हो, इसलिए अब वह किसी विदेशी बैंक में दिख नहीं रहा है!

 फिर वही लिस्ट!

पहले यूपीए की 'करमजली' और 'निठल्ली' सरकार ढूँढ रही थी! उसे भी काला धन नहीं मिला. एक लिस्ट मिली कुछ बरस पहले. तब से वह सरकार उसे सूँघने में लगी थी. फिर अलादीन का चिराग़ लेकर मोदी सरकार आ गयी! पूर्ण बहुमत वाली! मज़बूत! पक्के इरादों वाली! लोग बड़ी raagdesh the story of Indian and foreign black moneyउम्मीद से थे. देखना अब चुटकी बजाते ही चमत्कार हो जायेगा! लेकिन बेचारी सरकार के पास तो बस एक लिस्ट थी, जो उसे पिछली सरकार से मिली थी. सुप्रीम कोर्ट के कहने पर सरकार ने अपना काम सम्भालते ही जून में एसआइटी बना दी और लिस्ट उसे सौंप दी! तालियाँ बजीं! इसे कहते हैं चुस्त सरकार! अब आ जायेगा सारा काला धन! छह महीने बाद सुप्रीम कोर्ट के कहने पर सरकार ने बड़ी ना-नुकुर के बाद फिर वही पुरानी लिस्ट कोर्ट में जमा कर दी. वाया सुप्रीम कोर्ट वही लिस्ट फिर से एसआइटी के पास पहुँच गयी! बस तब से अब तक में एक फ़र्क़ है. तब नहीं खुली थी, लेकिन अब लिस्ट की पोल खुल चुकी है! यही कि लिस्ट में आधे तो एनआरआइ ही हैं, जिन पर देश के टैक्स क़ानून तो लागू ही नहीं होते! बाक़ी बची लिस्ट में बहुत-से खातों में एक दमड़ी भी नहीं है. सारा पैसा बरसों पहले ही कहीं और ठिकाने लगाया जा चुका है. बाक़ी बचे कुछ खातों में कुछ तो क़ानूनी रूप से बिलकुल सही बताये जा रहे हैं, कुछ पर कार्रवाई हो कर पहले ही जुर्माना वग़ैरह वसूला जा चुका है और जो बचे-खुचे 'काले' खाते हैं भी, उनमें कुछ ज़्यादा बड़ी रक़म नहीं पड़ी है! (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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