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Tag Archives: Paris attack

Jan 10
‘शार्ली एब्दो’ और अल-सिसी की आवाज़!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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'शार्ली एब्दो' और फिर उसके बाद पेरिस पर चरमपंथी इसलामी आतंकवादियों के नये हमलों के संकेत वाक़ई ख़तरनाक हैं. आज यह सवाल शिद्दत से पूछा जा रहा है कि इसलाम के एक ख़ास संस्करण, एक कूढ़मग़ज़ समझ और तथाकथित जिहाद के उन्माद ने क्या दुनिया को एक नये ख़तरे के कगार पर ला खड़ा किया है? और क्या यूरोप अब एक नये ध्रुवीकरण के कगार पर है? क्या 'ईसाई और मुसलिम सभ्यताओं' के टकराव की थ्योरी कहीं अगले कुछ बरसों में सच तो नहीं होनेवाली है, जिसकी चर्चा हाल के कुछ बरसों में रह-रह कर होती रही है! या फिर पूरी दुनिया मुसलिम और ग़ैर-मुसलिम के दो ध्रुवों में बँटने की ओर है?

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
सिडनी, पेशावर और फिर पेरिस! सीरिया, इराक़, नाइजीरिया, पाकिस्तान और जाने कहाँ-कहाँ! कहीं तालिबान, कहीं अल क़ायदा, कहीं बोको हराम, कहीं आइएसआइएस और कहीं कुछ और, कोई और! वहशत और दहशत की लगातार ख़ूँख़ार मुनादियाँ! इसलाम के एक ख़ास संस्करण, एक कूढ़मग़ज़ समझ और तथाकथित जिहाद के उन्माद ने क्या दुनिया को एक नये ख़तरे के कगार पर ला खड़ा किया है? आज यह सवाल शिद्दत से पूछा जा रहा है?

'शार्ली एब्दो': 2011 और 2015 का फ़र्क़

कार्टून पत्रिका 'शार्ली एब्दो' पर यह वहशियाना हमला क्यों हुआ? 'शार्ली एब्दो' कोई दक्षिणपंथी पत्रिका नहीं है. यह वाम रुझान की पत्रिका है, जो मानती है कि धर्म मानव की raagdesh- attack-oncharlie-hebdoस्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. चाहे वह कोई भी धर्म क्यों न हो. इसलिए उसके कार्टूनों के निशाने पर हमेशा कई धर्म रहे हैं, कैथोलिक ईसाई धर्म भी, यहूदी भी और इसलाम भी. यह अलग बात है कि पत्रिका के काफ़ी कार्टून अकसर चरमपंथी इसलाम और तथाकथित जिहादी तत्वों पर तीखा वार करते रहे हैं, क्योंकि हाल के बरसों में इसलामी चरमपंथ का हिंसक उभार पूरी दुनिया के लिए चिन्ता का विषय रहा है. लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी सही है कि 'शार्ली एब्दो' के कुछ कार्टून वाक़ई मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले और उन्हें चिढ़ाने वाले भी माने जा सकते हैं. इसीलिए कई बार उसने मुसलमानों की नाराज़गी मोल ली. तीन साल पहले, नवम्बर 2011 में उसके दफ़्तर पर हमला भी हुआ. लेकिन उस हमले और आज के हमले में बड़ा फ़र्क़ है. (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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