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Tag Archives: Modi

Sep 27
बिल्ली के भाग्य से छींका नहीं टूटेगा?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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मोदी आइडिया युद्ध, मुहावरा युद्ध, प्रतीक युद्ध, संवाद युद्ध कर रहे हैं, लगातार कर रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं. लेकिन इस मोर्चे पर उनके सारे विरोधी बिलकुल कंगाल हैं. अब मोदी अमेरिका में भी नवरात्र के उपवास पर रहेंगे. कहा जा रहा है कि वह चालीस साल से यह उपवास करते आये हैं. अब चाहे नवरात्र में अमेरिका की यात्रा होना महज़ एक संयोग ही हो, लेकिन मोदी की 'आध्यात्मिकता' की यह कहानी आज घर-घर में कही और सुनी जा रही है. ये तमाम कहानियाँ चाहे सच्ची हों या झूठीं, ये अपना काम बख़ूबी कर रही हैं! क्या विपक्ष में किसी के पास कहीं ऐसी कहानियाँ हैं?

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
नमो अब अमेरिका यात्रा पर हैं. अब वहाँ नमो-नमो हो रहा है! नमो वाक़ई बड़े कुशल खिलाड़ी हैं. ख़बरें बनाना जानते हैं. ख़बरों में रहना जानते हैं. मौक़ा कोई हो, बात कोई हो, यह 'नमो-ट्रिक' देश पहली बार देख रहा है कि राग नमो-नमो कैसे हमेशा चलता रहे! आलोचना करनेवाले मुँह बिसूरते रहें, विपक्ष वाले टुकुर-टुकुर तकते रहें, हाथ मलते रहें, लेकिन हर बार कुछ ऐसा हो जाय कि राग नमो की तान छिड़ जाय, यह राजनीति का नया ककहरा है. नमो जो करें, जो वह न करें, जो उन्होंने किया हो, जो उन्होंने न किया हो, हर चीज़ का श्रेय वह मज़े से लूट लेते हैं! मंगलयान से लेकर 'मेक इन इंडिया' तक, चीनी राष्ट्रपति की कसमसी हिंडोलों वाली भारत-यात्रा से लेकर मैडीसन स्क्वायर के मेगा शो तक नमो हर चीज़ को बड़े मज़े से 'इवेंट' और उत्सव बना देते हैं. वह 'इवेंट पॉलिटिक्स' के नये बाक्स आफ़िस फ़ार्मूले के साथ चतुर प्रतीकों के मसाले को बड़ी सफ़ाई से इस्तेमाल कर रहे हैं और देखने वाले बस देखते जा रहे हैं.

चुनाव-प्रचार जारी है!

दरअसल, मोदी को देख कर लगता ही नहीं कि उनका चुनाव-प्रचार कभी ख़त्म भी हुआ था या कभी ख़त्म भी होगा! वह तो अभी तक जारी है. नये-नये तरीक़ों से, नये-नये मौक़ों पर, नयी-नयी प्रतीकात्मकता के साथ! पिछले शिक्षक दिवस को ही लीजिए. इसके पहले शिक्षक दिवस को कब raagdesh modi and pr politicsऐसे मनाया गया. वही रस्मी सरकारी समारोह हुए, कुछ शिक्षकों का सम्मान हुआ, कुछ भाषण-वाषण और बस मन गया शिक्षक दिवस! अब लोग भले सवाल उठायें कि शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के बजाय बच्चों से बात करने का क्या तुक, लेकिन सच यह है कि नमो ने शिक्षक दिवस को एक ऐसा 'इवेंट' बना दिया कि कई दिनों तक देश के मीडिया में उसकी कवरेज होती रही! देश भर के बच्चे भी जुड़ गये! स्कूलों में पूरा ताममझाम हुआ, बच्चों ने भाषण सुना, सवाल पूछे, जवाब पाये, देश के प्रधानमंत्री से सीधा संवाद किया! अब इस पर कोई चाहे जो कहे, सच यह है कि मोदी ने बड़ी चतुराई से अपनी एक नयी 'कांस्टिट्युेन्सी' तो बना ही ली! ये बच्चे अगर नमो-नमो कर रहे हैं, तो हैरानी क्या? फिर ऐसा कर नमो ने देश के लोगों से सीधा संवाद रखने के नये रास्ते खोल लिये. वरना अब तक की परम्परा में तो प्रधानमंत्री या तो स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र से मुख़ातिब होता था या किसी बड़े गम्भीर मसले पर राष्ट्र के नाम सन्देश ले कर उपस्थित होता था. तो शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री ने जो दरवाज़ा खोला, उसकी अगली कड़ी का भी एलान हो चुका है. नमो अब विजयदशमी पर रेडियो से देश से संवाद करेंगे! (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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