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Sep 20
लेह और ‘लव जिहाद’ का अवलेह!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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संघ परिवार पिछले शायद पन्द्रह-बीस सालों से 'लव जिहाद' के नाम पर लोगों को भड़का रहा है. इतने राज्यों में इतने वर्षों तक बीजेपी की सरकारें रहीं, लेकिन सरकारी तौर पर आज तक एक भी ऐसा मामला क्यों नहीं पकड़ा जा सका, जहाँ यह साबित हो कि कोई अन्तर्धार्मिक विवाह किसी ख़ुफ़िया साज़िश के तहत रचाया गया था!

  --- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi लेह में चीनी सैनिक आये और दिल्ली में चीनी राष्ट्रपति आये! उपचुनाव के नतीजे भी आये. योगी आदित्यनाथ फ़िलहाल चुप बैठ गये हैं और 'लव जिहाद' वाली 'घृणा ब्रिगेड' भी फ़िलहाल कुछ दिनों के लिए शायद बेरोज़गार हो जाय! कश्मीर में बाढ़ का पानी उतार पर है तो उसके साथ देश में फैली गरम हवा भी मद्धिम पड़ रही है. कभी 'मुल्ला' मुलायम के क़सीदे पढ़ चुके साक्षी महाराज को अब मदरसे ज़हर बुझे नज़र आने लगे हैं. नरेन्द्र मोदी हालाँकि अब क़साईबाड़ों की बात नहीं करते, यह ज़िम्मा मेनका गाँधी ने सम्भाल लिया है! और अभी-अभी प्रधानमंत्री मोदी ने सीएनएन को दिये एक इंटरव्यू में कहा है कि भारतीय मुसलमान भारत के लिए जियेंगे और भारत के लिए मरेंगे!

क्या बीजेपी हिन्दुत्व को छोड़ सकती है?

यह देश की ताज़ा ख़बरें हैं! थोड़ी उलझी-गुलझी हुई! पता नहीं कौन-सी बात सही है? यह कि वह?कुछ लोगों को लगता है कि उपचुनाव में बीजेपी के सिर हिन्दुत्व का ही ठीकरा फूटा है! हो सकता है कि ऐसा हुआ हो, लेकिन raagdesh 'love jihad' and communal agenda of sangh parivarइससे अगर कुछ लोग उम्मीद करते हों कि उपचुनाव के नतीजों से घबरा कर परिवार हिन्दुत्व को पुरानी अालमारियों में रख देगा और देश में चैन की बंसी बजने लगेगी, तो यह शायद ज़रा ज़्यादा ही ख़ुशफ़हमी होगी! हालाँकि यह हो सकता है कि अगले कुछ महीनों तक हिन्दुत्व के कड़ाहों को भट्टी से उतार कर रखा जाये, क्योंकि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं. हो सकता है कि बीजेपी फिर विकास की जय बोलने लगे! अगर ऐसा हुआ तो भी यह नितान्त मौसमी होगा. चुनाव में तो वैसे भी सबके चेहरे बदल जाते हैं. तो परिवार का चेहरा भी कुछ दिनों के लिए बदल जाय तो अचरज कैसा? लोकसभा चुनाव के पहले से हिन्दुत्व के उभार की आशंकाओं को लेकर मैंने लगातार लिखा. वे सारी आशंकाएँ अब लगातार सही साबित होती जा रही हैं. हालाँकि चुनाव नतीजों के बाद के राजनीतिक आकलन में मुझसे ज़रूर बडी चूक हुई! मुझे लगा था कि बीजेपी को जिस तरह मुसलमानों के ठीक-ठाक वोट मिले हैं, उसके बाद वह शायद लम्बी रणनीति पर काम करे और ज़ाहिर तौर पर हिन्दुत्व का बिगुल न बजाये, बल्कि केवल विकास और गवर्नेन्स का डंका पीटे. इस चतुर रणनीति से बीजेपी को सबसे बड़ा फ़ायदा यह होता कि सेकुलरिज़्म का मुद्दा भारतीय राजनीति से सदा-सर्वदा के लिए ग़ायब हो जाता और बाक़ी सभी पार्टियाँ बीजेपी के मुक़ाबले निहत्थी हो जातीं. और पाँच साल बाद जब वह विकास की अपनी नुमाइश लगा कर चुनाव में उतरती, तो हिन्दुत्व का एजेंडा चलाने के लिए उसकी जड़ें कहीं ज़्यादा गहरी हो चुकी होतीं! उससे भी बड़ा फ़ायदा मोदी को होता, जो अरसे से विश्व नेता होने का सपना पाले हुए हैं और अब पूरे ज़ोर-शोर से उस रास्ते पर चल भी रहे हैं. लेकिन जब सरकार बनने के कुछ दिनों बाद से ही हिन्दूवादी भोंपुओं का खटराग शुरू हो गया, तो मुझे बड़ा अचम्भा हुआ. (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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