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Tag Archives: Kiran Bedi

Jan 17
दिल्ली के दिल में क्या है?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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19 जनवरी को देर रात बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एलान किया कि किरण बेदी बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होंगी. और वह हर्षवर्धन की गढ़ मानी जानेवाली सीट कृष्णा नगर से चुनाव लड़ेंगी. इस प्रकार अब यह ज़िम्मेदारी हर्षवर्धन की ही हो गयी है कि किरण बेदी वहाँ से जीत कर आयें. हर्षवर्धन समेत बीजेपी के कई नेता किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने की अटकलों से ख़ुश नहीं बताये जा रहे थे.

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दिल्ली विधानसभा चुनावों की गुत्थी अचानक एक विकट गुत्थमगुत्था लगने लगी है. अभी कुछ दिनों पहले तक लग रहा था कि लड़ाई एकतरफ़ा है और मोदी लहर दिल्ली में 'आप' की झाड़ू पर आसानी से झाड़ू लगा देगी! लेकिन अब यह पानीपत की लड़ाइयों जैसी भीषण, घनघोर, घमासान हो गयी है! और वैसे ही औचक नतीजों की सम्भावनाओं से भरी हुई! 'आप', बीजेपी और काँग्रेस. तीन पार्टियाँ, तीन चिन्ताएँ, तीन लक्ष्य! 'आप' के लिए अस्तित्व की लड़ाई, बीजेपी के लिए इज़्ज़त की लड़ाई और काँग्रेस के लिए बची रह गयी ज़मीन को बचाये रख पाने की लड़ाई! सवाल यह है कि इनमें से कौन जीतता है या कोई नहीं जीतता है? एक विश्लेषण.

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
दिल्ली जीते, फिर यहाँ जीते, फिर वहाँ जीते, इधर जीते, उधर जीते, पूरब जीते, पश्चिम जीते, उत्तर जीते, लेकिन अबकी बार दिल्ली का उत्तर क्या होगा? टेढ़ा सवाल है! अबकी बार, किसकी सरकार, किसका बंटाधार? सवाल एक नहीं, दो हैं! किसकी सरकार? किसका बंटाधार? या फिर जम्मू-कश्मीर की तरह अधर में अटकी सरकार? वैसे जम्मू-कश्मीर में सरकार क्यों अटक गयी? ऐसे तो गुत्थियाँ कई थीं. लेकिन सुनते हैं कि दिल्ली की गुत्थी ने वहाँ सब अटका दिया!

तीन पार्टियाँ, तीन चिन्ताएँ

दिल्ली की गुत्थी अचानक विकट गुत्थमगुत्था बन गयी है! अभी कुछ दिनों पहले तक लग रहा था कि लड़ाई एकतरफ़ा है! हर जगह मोदी लहर झाड़ू लगा रही है. तो दिल्ली में भी वह Kejriwal Versus Kiran Bedi Fight for Delhi Assembly Electionआसानी से 'आप' की झाड़ू पर झाड़ू फेर देगी! लेकिन अब? दिल्ली की जंग बहुत बड़ी हो गयी है! पानीपत की लड़ाइयों जैसी भीषण, घनघोर, घमासान! और वैसे ही औचक नतीजों की सम्भावनाओं से भरी हुई! सेनाएँ सज चुकी हैं. सेनापति चुन लिये गये हैं. केजरीवाल, किरण बेदी और अजय माकन. 'आप', बीजेपी और काँग्रेस. तीन पार्टियाँ, तीन चिन्ताएँ, तीन लक्ष्य! 'आप' के लिए अस्तित्व की लड़ाई, बीजेपी के लिए इज़्ज़त की लड़ाई और काँग्रेस के लिए बची रह गयी ज़मीन को बचाये रख पाने की लड़ाई! और मोदी-शाह जोड़ी ने तो किरण बेदी को मैदान में उतार कर वाक़ई इस लड़ाई को कुछ ज़्यादा ही गम्भीरता से ले लिया है! साफ़ है कि वह हर क़ीमत पर दिल्ली का यह चुनाव जीतना चाहते हैं. और इसीलिए फ़िलहाल जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की कोशिशों को भी ठंडे बस्ते में रख दिया गया, क्योंकि मुफ़्ती मुहम्मद सईद से समझौता करने के लिए बीजेपी को अनुच्छेद 370 और आफ़्स्पा जैसे कुछ मुद्दों पर नरम होना पड़ता और यह बात दिल्ली के चुनावों में उसके गले पड़ सकती थी. इसलिए अब जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की कोशिशें 7 फ़रवरी के बाद ही दुबारा शुरू होंगी! (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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