Follow Raagdesh

twitter google_plus linkedin facebook mail

Tag Archives: Internet

Oct 05
क्या होगा, जब आयेगी इंटरनेट की सुनामी?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 0 

'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ

इंटरनेट धीरे-धीरे युवाओं की अकेली ऐसी खिड़की बनता जा रहा है, जिसके ज़रिए वह दुनिया को, समाज को, अपने आसपास को देखते, जानते, समझते, पहचानते और जाँचते-परखते हैं. उनका पूरा जीवन वर्चुअल स्पेस में सिमट कर रह गया है. शहरों में जैसे ही बच्चे होश सम्भालते हैं, नाना-नानी, दादा-दादी, माँ-बाप के हाथों से उनकी उँगलियाँ छूटती जाती हैं और की-बोर्ड और माउस के ज़रिए वे एक आभासी संसार में प्रवेश करते हैं, जो उनकी मानसिक बनावट को शिफ़्ट, कंट्रोल, आल्ट, डिलीट, इंटर के मसाले से गढ़ता है! सब आनलाइन है. होमवर्क, चुटकुले, गेमिंग, दोस्त, सब आनलाइन! और जो आफ़लाइन है, वह है ही नहीं! या होता ही नहीं!

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
इंटरनेटजीवियों के बारे में यह ख़बर बिलकुल भी अच्छी नहीं है! इंटरनेट कम्पनियाँ ज़रूर इससे ख़ुश हो लें, लेकिन मुझे तो इसने थोड़ा डरा दिया है. वैसे, यह बात तो सभी जानते हैं कि इंटरनेट के बिना अब न दुनिया चल सकती है और न लोगों की ज़िन्दगी! लेकिन इस 'अन्तर्जाल' के 'इन्द्रजाल' में लोगों के प्राण इस तरह अटक चुके हैं, ऐसा शायद किसी ने सोचा भी न हो!

इंटरनेट के लिए सब छोड़ देंगे!

अभी इंटरनेटजीवी दुनिया पर एक सर्वे आया है. भारतीय कम्पनी 'टाटा कम्युनिकेशन्स' ने दुनिया के छह देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्राँस, जर्मनी, सिंगापुर और भारत में यह अध्य्यन किया. सर्वे की सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों ने कहा कि इंटरनेट कनेक्शन raagdesh internet addiction in indian youthsन हो तो उन्हें लगता है कि वह दुनिया से बिलकुल कट गये हैं, अलग-थलग पड़ गये हैं, पीछे छूट गये हैं, ग़ुस्सा आने लगता है, चिन्ता बढ़ जाती है, खोया-खोया-सा लगता है. हैरानी की बात यह है कि ऐसा महसूस करनेवालों में भारतीय सबसे आगे हैं. 82 प्रतिशत भारतीय ऐसा ही मानते हैं, जबकि जर्मनी मे ऐसा माननेवालों की संख्या सबसे कम यानी 45 प्रतिशत है. और ऐसा इसलिए है कि भारत में लोग दिन भर में सबसे ज़्यादा यानी हर दिन औसतन छह घंटे से भी ज़्यादा समय इंटरनेट पर बिताते हैं! और भारतीयों का हाल यह है कि वह बिना इंटरनेट के सात घंटे से ज़्यादा रह ही नहीं सकते. इससे भी चौंकानेवाली बात यह है कि लोगों ने कहा कि वे इंटरनेट के लिए शराब, टीवी, चॉकलेट, खेलकूद और यहाँ तक कि अन्तरंग सम्बन्ध को भी छोड़ देंगे! (more…)
'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ
ADD COMMENT
Most Viewed
muslim-population-myth-and-reality

क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth

मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
can-demonetisation-curb-black-money

तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
तीन तलाक़ और नयी सोशल इंजीनियरिंग तीन तलाक़ पर फ़ैसले के बाद क्या अब एक नयी सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत होगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या देश की राजनीति में हम एक नया मोड़ देखेंगे? ठीक वैसे ही जैसे मंडल के बाद दलित-पिछड़ा राजनीति के बिलकुल नये समीकरण देखे गये थे. हालाँकि पिछले तीन साल में [..] Read More
Follow Us On Facebook

Recent Posts