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Tag Archives: Indian Muslims

Jul 19
देखिए कि क्या दिखता है?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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यह भारत के मुसलमानों का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि उनका नेतृत्व हमेशा कठमुल्ला उलेमाओं के हाथ में रहा है, जो ख़ुद अपनी आदिम गुफ़ाओं में क़ैद हैं, जिन्हें न आधुनिक दुनिया की कोई समझ है, न समाज और राजनीति में आ रहे परिवर्तनों की कोई आहट! उनके पास सदियों पुराना एक चश्मा है. वह सब चीज़ उसी से देखते हैं. वह मुसलमानों को कभी धार्मिक पिंजड़े के बाहर नहीं देखना चाहते. इसीलिए मुसलमानों को हर मामले में हमेशा धार्मिक घुट्टी पिलायी जाती है. जबकि आज समय का तक़ाज़ा है कि मुसलिम उलेमाओं को अगर 'जिहाद' ही छेड़ना है तो वह हर तरह के धार्मिक कट्टरपंथ, पुनरोत्थानवाद और आतंकवाद के ख़िलाफ़ जिहाद छेड़ें, और मुसलिम समाज में प्रगतिशीलता की रोशनी आने दें.

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi दिल्ली से बग़दाद कितनी दूर है? ठीक-ठीक 3159 किलोमीटर. बीच में ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान. किसने सोचा था कि आग वहाँ लगेगी तो आँच तीन देशों को पार करते हुए अपने यहाँ तक आ जायेगी. वैसे तो इराक़ पिछले दस-बारह सालों से युद्ध से झुलस रहा है, लेकिन पहले कभी आज जैसी तपिश महसूस नहीं की गयी. तपिश नहीं, साज़िश. गहरी और भयानक साज़िश! अबू बकर अल बग़दादी ने 'इसलामी ख़िलाफ़त' की स्थापना कर अपने को इसलाम का स्वयंभू ख़लीफ़ा घोषित कर सबकी नींद उड़ा दी है. बड़ी मुसलिम आबादी वाले दुनिया के तमाम देश पुनरोत्थानवादी कट्टरपंथी इसलाम के बीज फैलने के ख़तरों से चौकन्ना हैं. लेकिन भारत के लिए स्थिति कहीं ज़्यादा नाज़ुक हो सकती है. और कहीं ज़्यादा जटिल भी. क्योंकि यहाँ समस्या के कई और पहलू हैं, जो और कहीं नहीं हैं!

तालिबान और अल-क़ायदा बौने

पुनरोत्थानवादी कट्टरपंथी इसलाम के कुछ डरावने, ज़हरीले, शर्मनाक नमूने हम पिछले कुछ बरसों में पड़ोसी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में देख चुके हैं! बामियान बुद्ध की ऐतिहासिक धरोहर को तहस-नहस करने से ले कर एक मासूम बच्ची मलाला यूसुफ़ज़ई पर क़ातिलाना हमले तक मनुष्य विरोधी, लोकतंत्र विरोधी, समानता विरोधी और प्रगति विरोधी इस सोच ने इन देशों में आतंक औraagdesh isis and indiaर ख़ौफ़ का साम्राज्य स्थापित कर रखा है. यह सब तालिबान और अल-क़ायदा के नापाक गँठजोड़ की देन है. लेकिन फिर भी यह हमारे लिए बहुत डरने की बात नहीं थी, क्योंकि भारत न अल-क़ायदा के नक़्शे पर था और न तालिबान के! लेकिन आइएसआइएस और अबू बकर अल बग़दादी अपने अभियान को सिर्फ़ इराक़ और सीरिया को मिला कर एक इसलामी राज्य बनाने तक ही सीमित नहीं रखना चाहते हैं. वह पूरी दुनिया में कट्टरपंथी 'इसलामी ख़िलाफ़त' का साम्राज्य स्थापित करना चाहते हैं! इसलिए तालिबान और अल-क़ायदा अब उसके आगे बिलकुल बौने हैं! (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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