Follow Raagdesh

twitter google_plus linkedin facebook mail

Tag Archives: India-Pakistan Relations

Sep 28
एक मुँह की कूटनीति और छल-कबड्डी!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 0 

पाकिस्तान के दो मुँह हैं. एक मुँह है सरकारवाला, दूसरा मुँह है सेना और आइएसआइ के राक्षस का. सरकारवाला मुँह हमें बातचीत का चुग्गा डालता रहता है, उधर, जो दूसरा मुँह है सेना और आइएसआइ के राक्षस का, वह साज़िशें रचता रहता है, नक़ली नोट छापता रहता है, आतंकवाद की फ़ैक्ट्रियों में भट्टियाँ गरमाये रखता है, कभी उसकी सेना, कभी उसके आतंकवादी टट्टू धावे बोलते रहते हैं!


Can India Pakistan Relations improve- Raag Desh280913.JPG
'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ
India-Pakistan Relations | क़मर वहीद नक़वी | Elusive Peace, Unending Conflict |
आप बात करते हैं. वह भी बात करते हैं. हमले होते हैं. बात अटकती है. वह कहते हैं कि बात करना तो ज़रूरी है. फिर बात होती है. फिर हमले होते हैं. आप ग़ुस्सा जताते हैं. फिर बात होती है. फिर कुछ सिर कटते हैं. कुछ ताबूत घर आते हैं. आप फिर कहते हैं, बात होगी, होती रहेगी. फिर मुलाक़ात होती है, फिर हाथ मिलते हैं, फिर मुस्कराती बत्तीसियाँ सब जगह छपती हैं, फिर अमन के मुहावरे बाँटे जाते हैं. फिर हमला, फिर कुछ शहीद, फिर कुछ ताबूत, फिर शहीदों को सलाम, फिर बात, फिर हमला, फिर बात, फिर हमला, फिर बात....

India-Pakistan Relations: Why is it so Complex?

पाकिस्तान: सरकार, सेना और आइएसआइ

पता नहीं बातें करते-करते आपके मुँह अब तक थके या नहीं, लेकिन बातों को सुनते-सुनते देश के कान ज़रूर पक चुके हैं. बातें हुईं, लेकिन बातों के पेट से निकले सिर्फ़ हमले, सिर्फ़ ताबूत. कभी सीमा पर हमले, कभी आतंकवादियों के हमले. अगर बातें न करते तो क्या होता? यही होता न कि कुछ हमले होते. तो फ़र्क़ क्या पड़ा? बात करो तो हमला, न बात करो तो भी हमला!बरसों से देख रहे हैं यह सब.
अपनी मूढ़मति को तो यह कूटनीति समझ में आती नहीं. जब बातों से कोई तेल न निकलना हो, तो उसका कोल्हू क्या पेरना? क्या मजबूरी है कि हम पाकिस्तान से बातें करते रहें और लातें खाते रहें? या तो कोई यह बताये कि बातों से अब तक हमें क्या फ़ायदा हुआ? बातों से अगर किसी को फ़ायदा होता है तो पाकिस्तान को होता है. उसके दो मुँह हैं. एक मुँह है सरकारवाला (PAK Government), दूसरा मुँह है सेना (PAK Army) और आइएसआइ (ISI) के राक्षस का.

Does Pakistan establishment really want peace with India?

क्या पाकिस्तान शान्ति चाहता है?

The Reality of India-Pakistan Relations!

सरकारवाला मुँह हमें बातचीत का चुग्गा डालता रहता है, आतंकवाद की निन्दा करता है, दावे करता रहता है कि पाकिस्तान ख़ुद आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार है, दुनिया को बताता रहता है कि पाकिस्तान तो शान्ति चाहता है और पूरी ताक़त से आतंकवाद से लड़ रहा है. उधर, जो राक्षसी मुख है, वह साज़िशें रचता रहता है, नक़ली नोट छापता रहता है, आतंकवाद की फ़ैक्ट्रियों में भट्टियाँ गरमाये रखता है, कभी उसकी सेना, कभी उसके आतंकवादी टट्टू धावे बोलते रहते हैं.
Proxy Wars and Peace Talks
नतीजा! एक मुँह हिंसा, तनाव और आतंकवाद के ज़रिये कश्मीर के मुद्दे को सुलगाये और भड़काये रखता है, दूसरा मुँह कहता रहता है कि कश्मीर मसले (Kashmir Problem) का हल आपसी बातचीत से निकलेगा, इसलिए आइए हम अमन-अमन खेलें!

चाशनियों के नीचे हमेशा ज़हर ही!

तो पाकिस्तान के लिए तो बात करना बड़े फ़ायदे का सौदा है. सारी साज़िशें वह रचता है, और उसका 'शरीफ़' प्रधानमंत्री बातों की छल-कबड्डी खेल-खेल कर अपनी 'शराफ़त' के प्वाइंट बटोरता रहता है. आज नवाज़ शरीफ़ हैं, उसके पहले ज़रदारी और गिलानी थे, उसके पहले करगिल की छुरी वाले परवेज़ मुशर्रफ़ थे जो भारत आये तो बोले कि इस बार 'नया दिल' लाया हूँ. उसके पहले 'पूरब की बेटी' बेनज़ीर भुट्टो थीं. लेकिन बदला क्या? सामने चेहरा कोई भी हो, कौन जाने इनमें से किसके इरादे नेक थे और कौन दिखावा कर रहा था, सारी चाशनियों के नीचे से हमेशा ज़हर ही तो निकला! हम बार-बार इस 'हनी ट्रैप' में क्यों फँस जाते हैं?

'छल-कबड्डी' में पाकिस्तान से ऐसे नहीं जीत सकते!

हम एक मुँह की कूटनीति से 'छल-कबड्डी' में पाकिस्तान से कभी जीत नहीं सकते. हम बात करके भी फँसते हैं और बात नहीं करेंगे तो भी फँसेंगे! बात नहीं करेंगे, तो दुनिया की नज़रों में पाकिस्तान हमें ही खलनायक, हमें ही मुजरिम साबित कर देगा. इसलिए यह सही है कि हमें पाकिस्तान से लगातार बातें करते रहना पड़ेगा. लेकिन हमारे पास सिर्फ़ एक मुँह है, जो बात करता है. सिर्फ़ बातों वाले मुँह से काम नहीं चलेगा और हम ऐसे ही मुँह की खाते रहेंगे! कुछ नये मुँह लाइए. अलग-अलग काम वाले मुँह. और फिर हो जैसा मुँह, वैसी बात!

कवि रहीम से कुछ सीखना चाहिए!

बहुत ज़माने पहले अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना कह गये हैं: "खीरा सिर से काटिये, मलियत नमक लगाय, रहिमन कड़ुवै मुखन को चहियत इहै सजाय." यानी खीरे की कड़वाहट दूर करने के लिए उसे सिर से काट कर नमक लगा कर मलते हैं, इसलिए जो कड़वाहट फैलाते हैं, उनका यही इलाज है. आज ज़रूर खीरे कड़वे नहीं आते और उन पर नमक लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन हमारी कूटनीति को रहीम से कुछ सीखना चाहिए.

(लोकमत समाचार, 28 सितम्बर, 2013)
http://raagdesh.com by Qamar Waheed Naqvi
'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ
ADD COMMENT
Most Viewed
muslim-population-myth-and-reality

क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth

मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
can-demonetisation-curb-black-money

तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है? लखनऊ में रविवार को राहुल-अखिलेश के साझा रोड शो के कुछ राजनीतिक सन्देश बड़े स्पष्ट हैं. एक, यह महज़ उत्तर प्रदेश का चुनावी गठबन्धन नहीं है, बल्कि 2019 का विपक्षी राजनीति का रोडमैप है. यानी गठबन्धन को लम्बा चलना है.

दो, दाँव पर सिर्फ़ एक चुनाव की [..] Read More
Follow Us On Facebook

Recent Posts