Follow Raagdesh

twitter google_plus linkedin facebook mail

Tag Archives: Independence of Juidiciary

Sep 06
यही होगा तो साख कहाँ से आयेगी?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 0 

'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ

सदाशिवम जी भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं. उन्हें राज्यपाल बनना चाहिए था या नहीं, क्या यह सवाल उनके लिए इतना कठिन है? क्या इसके लिए क़ानून की मोटी-मोटी पोथियाँ पलटने की ज़रूरत है? नहीं! सिर्फ़ अपनी अन्तरात्मा से पूछ लीजिए! वह बता देगी! अन्तरात्मा भी दुविधा में हो, तो अपने आसपास किसी बाज़ार में, मुहल्ले में घूम-टहल कर किन्हीं दस-बीस लोगों से पूछ लीजिए कि आपको इस 'बड़े कठिन' सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा है. और देखिएगा, लोग कैसे चुटकियों में आपकी समस्या हल कर देंगे कि माननीय जज साहब, भारत का मुख्य न्यायाधीश होने के बाद राज्यपाल की कुर्सी पर बैठने का आपका फ़ैसला सही नहीं लगता!

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

बच्चे थे, तब से सुन रहे हैं! शायद तब से अब तक हज़ारों बार सुन-पढ़ चुके हैं! न्याय न सिर्फ़ होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए! तो बाकी बातें छोड़ दीजिए, बस जी कर रहा है कि यही एक सवाल माननीय पी. सदाशिवम जी से पूछूँ. वह अपने दिल पर हाथ रख कर ईमानदारी से जवाब दे दें. उन्होंने जो क़दम उठाया है, क्या वह इस एक लाइन की कसौटी पर खरा उतरता है? न्याय न केवल हो, बल्कि होते हुए दिखे भी! उन्होंने जो फ़ैसला लिया है, वह न केवल उनकी निगाह में सही हो, बल्कि न्यायिक बिरादरी को भी, आम जनता को भी लगे कि यह फ़ैसला सही है. क्या उनके केरल का राज्यपाल बनने से न्यायपालिका की, न्यायाधीशों की गरिमा बढ़ेगी? न्यायपालिका की स्वतंत्रता को इस फ़ैसले से बल मिलेगा? क्या इन सवालों का जवाब हाँ है?

क्या यह सवाल इतना 'कठिन' था?

सदाशिवम जी भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं. अभी चार महीने पहले रिटायर हुए हैं. क्या यह सवाल उनके लिए इतना कठिन है? क्या इसके लिए क़ानून की मोटी-मोटी पोथियाँ पलटने की raagdesh should justice sathashivam has taken up governorshipज़रूरत है? नहीं! सिर्फ़ अपनी अन्तरात्मा से पूछ लीजिए! वह बता देगी! बड़े-बड़े पूर्व जज, क़ानूनविद्, पत्रकार-समीक्षक वग़ैरह-वग़ैरह क्या कह रहे हैं, मत सुनिए. अन्तरात्मा भी दुविधा में हो, तो अपने आसपास किसी बाज़ार में, मुहल्ले में घूम-टहल कर किन्हीं दस-बीस लोगों से पूछ लीजिए कि आपको इस 'बड़े कठिन' सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा है. और देखिएगा, लोग कैसे चुटकियों में आपकी समस्या हल कर देंगे कि माननीय जज साहब, भारत का मुख्य न्यायाधीश होने के बाद राज्यपाल की कुर्सी पर बैठने का आपका फ़ैसला सही नहीं लगता! (more…)
'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ
ADD COMMENT
Most Viewed
muslim-population-myth-and-reality

क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth

मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
can-demonetisation-curb-black-money

तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
तीन तलाक़ और नयी सोशल इंजीनियरिंग तीन तलाक़ पर फ़ैसले के बाद क्या अब एक नयी सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत होगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या देश की राजनीति में हम एक नया मोड़ देखेंगे? ठीक वैसे ही जैसे मंडल के बाद दलित-पिछड़ा राजनीति के बिलकुल नये समीकरण देखे गये थे. हालाँकि पिछले तीन साल में [..] Read More
Follow Us On Facebook

Recent Posts