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Oct 18
बीजेपी और बाज़ार के फ़ंडे!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आज के वोटर को बाज़ार के फ़ंडों से ही जीता जा सकता है! विचारधारा उसके काम की नहीं! विचारधारा वह जीता नहीं! वह उपभोक्ता है. बाज़ार में खड़ा है! जो 'प्रोडक्ट' देखने में आकर्षक लगेगा, जिसमें ज़्यादा 'फ़ीचर्स' होंगे, जिसमें ज़्यादा 'वैल्यू फ़ार मनी' दिखायी दे, जिसमें कोई लुभावनी 'यूएसपी' हो, जो सबसे ज़्यादा काम का लगे, जिसके लिए बाज़ार में 'क्रेज़' हो, जो थोड़ा 'ट्रेंडी' हो और जो आकर्षक 'डिस्काउंट' पर या किसी 'एक ख़रीदो, एक पाओ' जैसे 'आॅफ़र' के साथ हो, उसे वह लपक कर ख़रीदता है! 'ब्रांड मोदी' ने ऐसे ही फंडों से ख़ूबसूरती से अपनी पैकेजिंग की है और दूसरी तरफ़ वह अपने मुख्य प्रतिद्वन्द्वियों के ख़िलाफ़ बेहद 'निगेटिव परसेप्शन' भी चतुराई से खड़ा कर देने में माहिर हैं. इसलिए आगे की राजनीति अब जो भी दल अपने अब तक के आलसी और घिसे-पिटे तरीक़ों से करते आयेंगे, वह मुँह की खाते रहेंगे!

यह लेख महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटों की गिनती के एक दिन पहले यानी शनिवार 18 अक्तूबर 2014 को छपा था और इसे 17 अक्तूबर 2014 को लिखा गया था.

  --- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi तेईस साल पहले बीज काँग्रेस ने बोया था, फल आज मोदी खा रहे हैं! खेती बाज़ार की हुई, फ़सल राजनीति की काटी गयी! जय बाज़ारवाद! जय उपभोक्तावाद! तेईस साल पहले जो पहली बार वोटर बने थे, वह बाज़ार के दौर में गृहस्थ हुए और तेईस साल बाद अभी जो पहली बार वोटर बने हैं, वह बाज़ार के दौर में जवान हुए! मोदी और उनके मैनेजरों ने बख़ूबी इस बात को पकड़ा! बाज़ार में पले-बढ़े, जिये, जवान हुए वोटर को क्या चीज़ कैसे बेची जा सकती है? कैसे नारे, कैसे पोस्टर, कैसे भाषण, कैसे विज्ञापन, कैसी चाल, कैसी ढाल, कैसी बोली, कैसी शैली, कैसी स्टाइल, कैसी प्रोफ़ाइल! नतीजा सामने है! राजनीति की एक बिलकुल नयी क़िस्म, जो बाज़ार के नियमों से बनती है और चलती है! ब्राँडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन! यहाँ नीति और विचारधारा अकसर नेपत्थ्य में रहती है, रणनीति और 'परसेप्शन' से जीत-हार तय होती है! इसलिए इस विधानसभा चुनाव में भी ठीक-ठीक वही हुआ, जो सबने लोकसभा चुनाव में देखा था! मोदी और उनकी टीम ने यह चुनाव भी ठीक वैसे ही लड़ा, जैसे उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा था! वैसी ही धुँआधार रैलियाँ, वैसा ही raagdesh brand modi bjp and its marketing campaignआक्रामक प्रहार, वैसा ही 'परसेप्शन' का युद्ध, वैसा ही प्रचार, सब कुछ इतना तूफ़ानी, ऐसा सुनामी जैसा कि दूसरा कोई दूर-दूर तक दिख ही नहीं पाये! आज से पहले कब किस प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनावों में अपने आपको इस तरह झोंका है! दोनों राज्यों में मोदी ने 38 रैलियाँ कीं. लोग आलोचना करते रहे कि सीमा पर पाकिस्तान की लगातार गोलाबारी और हुदहुद के ख़तरों से बेफ़िक्र प्रधानमंत्री दिल्ली छोड़ कर दिन-रात चुनाव-प्रचार में लगे हुए हैं! देश पर संकट है और प्रधानमंत्री विधानसभा चुनाव जैसी छोटी चीज़ में उलझे हुए हैं! पर मोदी को ऐसी बातों की फ़िक्र कहाँ कि सामान्य स्थिति में भी किसी प्रधानमंत्री ने कभी अपने आपको राज्यों के चुनाव में ऐसे नही उलझाया! अटल बिहारी वाजपेयी ने भी नहीं, जो बड़े अच्छे वक्ता थे! (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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