Follow Raagdesh

twitter google_plus linkedin facebook mail

Tag Archives: Cadaver

Jun 21
छह साल से चेन्नई ज़िन्दाबाद!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 0 

'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ
--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

चेन्नई छह साल से लगातार ज़िन्दगी का करिश्मा बाँट रहा है! वैसे वाक़ई बड़ा अचरज होता है! भारत में ऐसा भी शहर है, ऐसे भी डाक्टर हैं, ऐसी भी पुलिस है, ऐसे भी लोग हैं! मुम्बई की एक अनजान लड़की को नयी ज़िन्दगी सौंपने को सारा शहर एक हो जाये! और यह कमाल पिछले छह सालों से हो रहा है! पहली बार 2008 में डाक्टरों और पुलिस ने मिल कर यह 'ग्रीन चैनल' बनाया था और तब से अब तक इस तरीक़े से वहाँ न जाने कितनी ज़िन्दगियाँ बचायी जा चुकी हैं. लेकिन बाक़ी देश ने चेन्नई से कुछ नहीं सीखा!

  चेन्नई ज़िन्दाबाद! सचमुच पहली बार लगा कि ज़िन्दाबाद किसे और क्यों कहना चाहिए! चेन्नई छह साल से लगातार ज़िन्दगी का करिश्मा बाँट रहा है! इसलिए ज़िन्दाबाद! वैसे वाक़ई बड़ा अचरज होता है! भारत में ऐसा भी शहर है, ऐसे भी डाक्टर हैं, ऐसी भी पुलिस है, ऐसे भी लोग हैं! मुम्बई की एक अनजान लड़की को नयी ज़िन्दगी सौंपने को सारा शहर एक हो जाये! डाक्टर जी-जान से जुट जायें, नाके-नाके पर पुलिस तैनात हो जाये, शहर का ट्रैफ़िक थम जाये ताकि एक धड़कता हुआ दिल सही-सलामत और जल्दी से जल्दी एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल पहुँच जाये और ट्रांसप्लांट कामयाब हो सके! वे डाक्टर, वे पुलिसवाले और ग्रामीण स्वास्थ्य नर्स का काम करनेवाली एक माँ, जो अपने 27 साल के बेटे के अंग दान के लिए आगे बढ़ कर तैयार हो गयी, ये सब के सब लोग ज़िन्दगी के सुपर-डुपर हीरो हैं! और यह बात भले ही ख़बरों में अभी आयी हो, लेकिन चेन्नई में यह कमाल पिछले छह सालों से हो रहा है! जी हाँ, पिछले छह सालों से, जब भी वहाँ किसी मरीज़ को ऐसी ज़रूरत पड़ी, तो वहाँ ट्रैफ़िक को थाम कर 'ग्रीन चैनल' बनाया गया ताकि ट्रांस्प्लांट के लिए ज़रूरी अंग एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक जल्दी से जल्दी पहुँचाया जा सके. पहली बार 2008 में डाक्टरों और पुलिस ने मिल कर यह 'ग्रीन चैनल' बनाया था और ट्रांस्प्लांट के लिए एक दिल सिर्फ़ 14 मिनट में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया गया था. तब से अब तक इस तरीक़े से वहाँ न जाने कितनी ज़िन्दगियाँ बचायी जा चुकी हैं, न जाने कितने परिवारों को अनमोल ख़ुशियो का ख़ज़ाना बाँटा जा चुका है. मुम्बई की उस लड़की का परिवार इसीलिए चेन्नई आया था क्योंकि उन्हें बताया गया था कि देश में तमिलनाडु अकेला राज्य है, जहाँ ट्रांस्प्लांट के लिए दिल मिल सकने की अच्छी सम्भावना बन सकती है. और तमिलनाडु ने उन्हें निराश नहीं किया! Raagdesh छह साल से चेन्नई ज़िन्दाबाद! तो रोशनियाँ तो हैं हमारे आसपास! अकसर टिमटिमा कर झलक भी दिखला जाती हैं! लेकिन उनकी तरफ़ देखने में दिलचस्पी किसे है, फ़ुरसत किसे है? परवाह भी किसे है? ऐसे कामों से न धनयोग बनता है और न राजयोग! न नोट हो, न वोट! तो फिर सरकार हो, नेता हो, बाबू हो, साहब हो, सेठ हो, कौन खाली-पीली फोकट में टैम खराब करे! वरना चेन्नई कोई जंगल तो है नहीं कि मोर नाचे और किसी को पता न चले! वह महानगर है. छह साल से 'ग्रीन चैनल' की रोशनी चमका रहा है, लेकिन नक़लचियों के उस्ताद इस देश में किसी और महानगर ने चेन्नई की नक़ल नहीं की! कभी-कभी बड़ी हैरानी होती है. ऐसा कैसे कि पूरा सिस्टम, पूरा तंत्र, मानस, सोच, सब कुछ ऐसा हो जाये कि जो साफ़-साफ़ दिख रहा हो कि बकवास है, झूठ है, फ़रेब है, रत्ती भर भी सही नहीं है, जिससे न उनका भला होगा और न देश का, लोग उस पर उद्वेलित हो उठें, लड़ मरें और सचमुच जो बात उनके असली काम की हो, जिससे उनका और देश का जीवन बेहतर बनता हो, ज़िन्दगियाँ सँवरती हों, उससे मुँह फेर कर बैठे रहें! (more…)
'राग देश' ईमेल पर मंगाएँ
ADD COMMENT
Most Viewed
muslim-population-myth-and-reality

क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth

मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
can-demonetisation-curb-black-money

तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
तीन तलाक़ और नयी सोशल इंजीनियरिंग तीन तलाक़ पर फ़ैसले के बाद क्या अब एक नयी सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत होगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या देश की राजनीति में हम एक नया मोड़ देखेंगे? ठीक वैसे ही जैसे मंडल के बाद दलित-पिछड़ा राजनीति के बिलकुल नये समीकरण देखे गये थे. हालाँकि पिछले तीन साल में [..] Read More
Follow Us On Facebook

Recent Posts