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Tag Archives: Alliance Politics

Oct 25
अबकी बार, क्या क्षेत्रीय दल होंगे साफ़?
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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काँग्रेस के पिट चुकने के बाद बीजेपी का अगला निशाना क्या है? क्या अब बारी क्षेत्रीय दलों और क्षत्रपों की है? क्या क्षेत्रीय राजनीति अब इतिहास बनने वाली है? क्या वाक़ई देश की राजनीति ऐसे मुक़ाम पर पहुँच गयी है, जहाँ क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता ख़त्म हो चुकी है या ख़त्म होनेवाली है? क्या सचमुच ऐसा हो सकता है या होनेवाला है कि अगले कुछ वर्षों में कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर राज्य में भगवा जलवा ही नज़र आये?

--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi राजनीति से इतिहास बनता है! लेकिन ज़रूरी नहीं कि इतिहास से राजनीति बने! हालाँकि इतिहास अकसर अपने आपको राजनीति में दोहराता है या दोहराये जाने की सम्भावनाएं प्रस्तुत करता रहता है! चौदह के चुनावी कलश से मिले शक्तिवर्धक रसायन के बाद बीजेपी भी ऐसी तमाम सम्भावनाओं से गदगद है! कहा जा रहा है कि बीजेपी अब काँग्रेस बनने की तैयारी में है! अचकचाइए नहीं! गाँधी, नेहरू और इन्दिरा के बैज-बिल्ले अपनी क़मीज़ पर टाँक लेने के बावजूद न तो बीजेपी आज की टुटही काँग्रेस जैसी बनना चाहती है और न ही काँग्रेस की वैचारिक चादर ओढ़ने का उसका कोई विचार है! बीजेपी चाहती है अपने पूरे भगवा रंग के साथ देश पर वैसे ही एकछत्र राज करना, जैसा किसी ज़माने में काँग्रेस किया करती थी! क्या आज ऐसी सम्भावनाएँ बन रही हैं? काँग्रेस के पिट चुकने के बाद क्या अब बारी क्षेत्रीय दलों और क्षत्रपों की है? क्या क्षेत्रीय राजनीति अब इतिहास बनने वाली है? क्या सचमुच ऐसा हो raagdesh regional parties will be bjp's next targetसकता है या होनेवाला है कि अगले कुछ वर्षों में कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर राज्य में भगवा जलवा ही नज़र आये? पिछले हफ़्ते चुनाव नतीजे आने के ठीक पहले मैंने लिखा था कि मोदी (यानी बीजेपी) अब गठबन्धन की राजनीति शायद नहीं ही करना चाहें. और नतीजे आने के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक इंटरव्यू में बाक़ायदा यही बात कह दी कि गठबन्धन की राजनीति के दिन अब लद चुके हैं! क्या लोकसभा चुनावों के बाद महज़ दो राज्यों में मिली जीत से बीजेपी गर्व से फूल कर कुप्पा हो गयी कि ऐसे बयान आने लगे या फिर वाक़ई देश की राजनीति ऐसे मुक़ाम पर पहुँच गयी है, जहाँ क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता ख़त्म हो चुकी है या ख़त्म होनेवाली है? (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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