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Tag Archives: 2014 Elections

May 17
करिश्मे की उम्मीद का करिश्मा!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

यह वोट बीजेपी को क़तई नहीं, केवल मोदी को है. यह वोट केवल इस उम्मीद में है कि बस मोदी में ही ऐसा करिश्मा है जो देश का भविष्य बदल देगा. यह वोट जितना एक करिश्मे की उम्मीद में है, उतना ही यह वोट पिछले तीन-चार साल की अपनी हताशाओं के ख़िलाफ़ भी है. यह वोट एक 'लाचार' सरकार के ख़िलाफ़ भी है....अब मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि उन्होंने अपने करिश्मे की जैसी मार्केटिंग की है, उसे वह पूरा करके दिखाएँ. उधर, काँग्रेस अपने जीवन के शायद सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है. अब इस करारी हार के बाद पार्टी के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि वह ऐसा नेतृत्व दे, जो नरेन्द्र मोदी के मुक़ाबले बड़ी लकीर खींच सके. काँग्रेस को यह काम जल्दी से जल्दी करना पड़ेगा, वरना वह जिस तेज़ी से तमाम राज्यों से ग़ायब होती जा रही है, यही हाल रहा तो कुछ सालों बाद वह केवल इतिहास की किताबों में ही दिखेगी! दूसरी तरफ़, यह चुनाव 'आप' के लिए भी बहुत बड़ा सबक़ है. 'आप' को सोचना चाहिए कि राजनीति ताश का खेल नहीं है कि 'ब्लाइंड' और 'धुप्पल' चालें चल कर देखा जाय. 'आप' को समझना चाहिए कि वह अब भी एक बड़ी राजनीतिक सम्भावना है, बशर्ते कि वह 'ग़लतियाँ' करने की अपनी लत से उबर सके!

तो करिश्मे की उम्मीद में करिश्मा जीत गया! आज़ादी के बाद देश ने अपने इतिहास के सबसे बड़े करिश्मे को घटित होते हुए देखा. आँकड़े आ चुके हैं, कहानी साफ़ है. अब इससे इनकार नहीं हो सकता कि यह लहर नहीं, मोदी के करिश्मे की सुनामी थी, जिसने गठबन्धन की राजनीति के दुर्गम पहाड़ों को बहा दिया, काँग्रेस का कचूमर निकाल दिया, वाम राजनीति को अतीत बना दिया, मायावती, लालू, नीतिश, मुलायम की जातीय और बंधुआ वोट बैंक की राजनीति के सारे समीकरण तहस-नहस कर डाले. बस, जयललिता, ममता, नवीन पटनायक और तेलंगाना के चन्द्रशेखर राव की क्षेत्रीय राजनीति के क़िले ही अपने आपको टिकाये रख पाये. raagdesh करिश्मे की उम्मीद का करिश्मा! अब कोई अगर यह समझता है कि यह बीजेपी की जीत है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी. यह वोट बीजेपी को क़तई नहीं, केवल मोदी को है. यह वोट केवल इस उम्मीद में है कि बस मोदी में ही ऐसा करिश्मा है जो देश का भविष्य बदल देगा, विकास सरपट दौड़ने लगेगा, महंगाई डायन भाग कर कोई और घर देखेगी, भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा, चीन-पाकिस्तान अपनी 'औक़ात' में आ जायेंगे, और सरकार सच में सरकार की तरह लगने लगेगी. और मोदी से करिश्मा कर दिखाने की इसी उम्मीद का यह करिश्मा है कि ख़ुद बीजेपी के नेता बता रहे हैं कि कई राज्यों में दलितों और मुसलमानों ने भी कमल पर मुहर लगाने का जोखिम उठाया. यह भी तब, जब चुनाव में मोदी हिन्दुत्व के तमाम प्रतीकों का चतुराई से इस्तेमाल करते रहे, अमित शाह साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की इंजीनियरिंग करते रहे, गिरिराज सिंह जैसे कुछ नेता मोदी-विरोधियों को पाकिस्तान भेज देने की धमकी देते रहे, अशोक सिंहल गुजरात के भावनगर में एक मुसलमान को उसके घर में न घुसने देने के लिए तमाशा करते रहे, लेकिन फिर भी सब कुछ दरकिनार कर अगर कुछ जगहों पर मुसलमानों ने मोदी को यह कह कर वोट दिया है कि मोदी को वोट दे रहे हैं, बीजेपी को नहीं, तो इसी उम्मीद से कि मोदी ज़रूर ऐसा करिश्मा कर दिखायेंगे, जिसके सपने वह बेच रहे हैं. बहरहाल, मोदी के बहाने संघ को आख़िर वह क़िस्मत की चाबी मिल ही गयी, जिसे वह बड़ी बेताबी से तलाश रहा था! (more…)
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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