Follow Raagdesh

twitter google_plus linkedin facebook mail

Naqvi Ki Pathshala

यह Times Trainee Journalist Scheme की ही प्रेरणा है कि मुझे पत्रकारिता के छात्रों से बातें करना, और जो मैं उन्हें सिखा सकता हूँ, वह सिखा देना बहुत प्रिय है. 1995 में ‘आज तक’ के शुरुआती दिनों में मैंने पाया कि ज़्यादातर टीवी पत्रकारों को स्क्रिप्ट लिखने में बड़ी परेशानी होती है. समझ में नहीं आता कि कहाँ से शुरू करें, कहाँँ पर ख़त्म! कौन-सी बाइट पहले लगायें, कौन-सी बाद में और क्यों? आज भी टीवी पत्रकारों की सबसे बड़ी समस्या यही है!

क्या स्क्रिप्ट राइटिंग का कोई फ़ार्मूला है? जी हाँ, है तो. आमतौर पर टीवी पत्रकारिता के छात्रों को मैं यही पढ़ाता हूँ. क्योंकि पत्रकारिता में दो ही चीज़ें मुझे बेहतर आती हैं— कापी लिखना और ले-आउट. टीवी में तो ले-आउट की ज़रूरत नहीं, और प्रिंट में अब यह कम्प्यूटरों से होने लगा है. कापी ज़रूर अभी तक मनुष्यों के ही ज़िम्मे है!

‘नक़वी की पाठशाला’ कहीं भी लग सकती है, बशर्ते कि छात्र गम्भीरता से सीखना चाहें.