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Mar 05
‘भक्त’, ‘अभक्त’ और कन्हैया!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 26 

इक्कीस महीनों से इक्कीसवीं सदी के इस महाभारत का चक्रव्यूह रचा जा रहा था. अब जा कर युद्ध का बिगुल बजा. लेकिन चक्रव्यूह में इस बार अभिमन्यु नहीं, कन्हैया है. तब दरवाज़े सात थे, इस बार कितने हैं, कोई नहीं जानता! लेकिन युद्ध तो है, और युद्ध शुरू भी हो चुका है. यह घोषणा तो ख़ुद संघ की तरफ़ से कर दी गयी है. संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी का साफ़-साफ़ कहना है कि देश में आज सुर और असुर की लड़ाई है.


Kanhaiya Kumar- Nationalism Debate and RSS - Raag Desh 050316.jpg
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'भक्त' और 'अभक्त' में देश विभक्त है! और तप्त है! इक्कीस महीनों से इक्कीसवीं सदी के इस महाभारत का चक्रव्यूह रचा जा रहा था. अब जा कर युद्ध का बिगुल बजा. लेकिन चक्रव्यूह में इस बार अभिमन्यु नहीं, कन्हैया है. तब दरवाज़े सात थे, इस बार कितने हैं, कोई नहीं जानता! लेकिन युद्ध तो है, और युद्ध शुरू भी हो चुका है. यह घोषणा तो ख़ुद संघ की तरफ़ से कर दी गयी है. संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी का साफ़-साफ़ कहना है कि देश में आज सुर और असुर की लड़ाई है.

Kanhaiya Kumar and the battle between 'Sur' and 'Asur'

तो सुर कौन? और असुर कौन? और सुर-असुर के युद्ध में समुद्र मंथन भी होता है. विष भी निकलता है, अमृत भी. मंथन होगा क्या? कैसा होगा मंथन? विष कौन पियेगा? कोई नीलकंठ बनेगा या नहीं? अमृत किसके खाते में जायेगा? और कोई राहू-केतु भी होगा क्या? प्रश्न बहुत हैं. उनके उत्तर देने के लिए हमारे पास कोई यक्ष नहीं.

कौन सुर? कौन असुर?

तो 'भक्त' और 'अभक्त' में तो कोई कन्फ़्यूज़न है नहीं. परिभाषा स्पष्ट है कि 'भक्त' किसे कहते हैं और 'अभक्त' क्या होता है. यह भी तय है कि जो 'भक्त' है, वह निस्सन्देह 'देशभक्त' है. और जो 'अभक्त' है, वह क्या है? वैसे फ़ेसबुक पर अपने मित्र नीलेन्दु सेन की बड़े मार्के की सलाह थी कन्हैया को, 'जो भक्त नहीं, वह देशभक्त नहीं कन्हैया बाबू!'

Kanhaiya Kumar : A Creation of 'Parivar' and Modi Govt Antics!

यानी 'देशभक्त' कहलाना हो तो 'भक्त' बन जाओ! तो समझ ही गये होंगे आप कि देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट बाँटने वाला दफ़्तर कहाँ है. और सुर-असुर का मतलब? वह आप अपने विवेक से तय कर लीजिए! या फिर संघ वालों से पूछ लीजिए कि वह 'सुर' किसे मानते हैं और 'असुर' किसे? आख़िर यह जुमला तो उन्हीं का आविष्कार है!

संघ क्यों है इतनी जल्दी में?

2013 में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने एक भाषण में कहा था कि भारत अगले तीस साल में हिन्दू राष्ट्र बन जायेगा. तब शायद बहुत लोगों ने इसे बिलकुल गम्भीरता से नहीं लिया होगा, लेकिन मैं तभी से लगातार लिखता आ रहा हूँ कि यह मोहन भागवत का 'जुमला' नहीं, बल्कि उनका ठोस राजनीतिक आकलन हैं, जिसके ठोस कारण धरातल पर दिख रहे हैं. (Click to Read) हालाँकि अब पिछले इक्कीस महीनों को देख कर मुझे तो लगता है कि तीस साल तो क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शायद हिन्दू राष्ट्र को लेकर वाक़ई बड़ी जल्दी में है. शायद इसीलिए 'सुर-असुर युद्ध' की एकतरफ़ा घोषणा संघ ने इतनी जल्दी कर दी.

एकतरफ़ा लड़ाई की उम्मीद

और शायद संघ को उम्मीद है कि यह लड़ाई एकतरफ़ा ही रहेगी और आसानी से जीत ली जायेगी. क्योंकि मामला राष्ट्रवाद से जोड़ा जा चुका है, लोगों में राष्ट्रप्रेम का ज्वार जगाया जा चुका है और इस राष्ट्रवाद को आसानी से 'हिन्दू राष्ट्रवाद' की तरफ़ मोड़ा जा सकेगा. संघ को लगता है कि अब भी मौसम उसके लिए साफ़ है क्योंकि विपक्ष इक्कीस महीनों में संसद में भले गरजा हो, कुछेक चुनावों में भले ही कुछ जगहों पर कड़कड़ा कर चमका भी हो, लेकिन वह बरस तो बिलकुल नहीं सका. जनता फ़िलहाल विपक्ष को केन्द्र में सत्ता सौंपने को तैयार नहीं दीखती. न उसके पास विश्वसनीयता है, न नारे हैं, न कार्यक्रम हैं, न नेता है और न दिशा है. इससे बेहतर स्थिति भला और क्या होगी? और मोदी हवा का जो ढलता हुआ रुख़ है, उसे देखते हुए कौन जाने ऐसा अनुकूल मौसम कब तक रहे, इसलिए जल्दी-जल्दी सब कर डालो, यही सोच कर शायद संघ इतनी जल्दी में है. वरना तीस साल में तो अभी पूरे सत्ताइस साल बाक़ी हैं.

From Intent to Content, Kanhaiya Kumar Speech had every right element

लेकिन यह लड़ाई क्या वाक़ई एकतरफ़ा होगी या वैसी दिख रही है? कम से कम रिहाई के बाद दिये गये कन्हैया के भाषण से तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता. छात्रों की ऐसी भारी भीड़, टीवी चैनलों पर ऐसी ज़बर्दस्त कवरेज और फिर ऐसा सधा हुआ भाषण, ऐसी ज़बर्दस्त राजनीतिक सूझबूझ, और यह समझ कि आगे की लड़ाई कैसे और किन मुद्दों पर लड़नी है, रणनीति क्या होगी, तरीक़े क्या होंगे, हथियार क्या होंगे, कन्हैया के भाषण में सब था. और यह इरादा भी साफ़ था कि वह इस लड़ाई में कूद चुका है.

कहीं मुसीबत न बन जाये कन्हैया?

और आज यह सवाल हर तरफ़ चर्चा में है कि कन्हैया कहीं मोदी सरकार की नयी मुसीबत न बन जाये? जेएनयू के आभामंडल को इस तरह निशाना बना कर दिल्ली में वामपंथ की 'नर्सरी' को ढहा देने की संघ, बीजेपी और मोदी सरकार का तीर कहीं उलटा तो नहीं लौटने वाला है? और क्या 'काँग्रेस-मुक्त भारत' की बात के बाद अब 'वाम-नाश' की अकुलाहट में 'परिवार' और मोदी सरकार से ऐसी ग़लती हो गयी, जो बहुत भारी पड़ सकती है?

Kanhaiya Kumar says Rohith Vemula is his Icon

कन्हैया का साफ़-साफ़ आरोप है कि रोहित वेमुला के मामले को लेकर छात्रों में फैली बेचैनी को नेपथ्य में ढकेलने के लिए जेएनयू को निशाना बनाने की साज़िश रची गयी. जेएनयू प्रकरण में अब तक जो बातें सामने आयी हैं, उनसे सवाल तो कई उठते हैं. पहला तो यही कि 9 फ़रवरी को जेएनयू में मीडिया को किसने बुलाया? जिसने कार्यक्रम का आयोजन किया, उसने तो नहीं बुलाया! कार्यक्रम किसी और संगठन का हो, तो मीडिया को एबीवीपी के लोग क्यों बुलाने जायें? क्या उन्हें पहले से पता था कि कार्यक्रम में देश-विरोधी नारे लगेंगे? और अगर पता था तो यह भी पता होगा कि ऐसे नारे कौन लगायेगा? तो उन्होंने पुलिस को पहले से इसकी सूचना क्यों नहीं दी? और नारे लगने के तीन दिन बाद तक इस घटना को उजागर क्यों नहीं किया गया? फ़र्ज़ी वीडियो किसने बनाये? पुलिस ने अब तक यह जाँच करने की कोशिश नहीं की कि वे नक़ाबपोश लड़के कौन थे, जिन्होंने ऐसे नारे लगाये? पुलिस ने यह जाँचने की भी कोशिश नहीं की फ़र्ज़ी वीडियो किसने बनाये और किन न्यूज़ चैनलों ने उसे बिना जाँचे-परखे क्यों चला कर लोगों को भड़काने की कोशिश की. ख़ास कर तब, जबकि एक चैनल का एक पत्रकार यह आरोप लगा कर इस्तीफ़ा दे चुका है कि उससे वीडियो में छेड़छाड़ करने के लिए कहा गया. क्या यह जाँच का मुद्दा नहीं है? और अगर पुलिस इस सबकी जाँच की ज़रूरत नहीं समझती तो साफ़ है कि जेएनयू के मामले के पूरे सच को दबाया जा रहा है.

कन्हैया एक बुलबुला या नयी छात्र राजनीति की आहट?

यह सब बातें अब सामने हैं और ज़ाहिर-सी बात है कि कन्हैया इन मुद्दों को लेकर छात्रों के बीच जायेगा. फ़िल्म इंस्टीट्यूट, हैदराबाद विश्विद्यालय, फिर जेएनयू और उसके बाद एएमयू यानी अलीगढ़ मुसलिम विश्विद्यालय को लेकर शुरू हुए ताज़ा विवाद के बीच क्या मोदी सरकार ने कन्हैया के रूप में एक नये छात्र नेतृत्व को रातोंरात नहीं पैदा कर दिया? कन्हैया का एजेंडा साफ़ है—समानता, समाजवाद और सेकुलरिज़्म. और राजनीतिक गँठजोड़ भी स्पष्ट है. सीमा पर लड़ रहे जवान से लेकर खेतों में क़र्ज़ के बोझ तले मर रहे किसान तक, ग़रीब मज़्दूर, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाएँ— इन सबके लिए इनसाफ़ और इज़्ज़त की आवाज़ उठाना. रोहित वेमुला उसका नायक है. इसमें सुर कौन है और असुर कौन? लड़ाई अगर शुरू हुई तो दूर तक पहुँचेगी. सवाल यह है कि संसद में रस्मी लड़ाई के आदी हो गये विपक्ष के कारण सड़कों पर उपजी राजनीतिक शून्यता में कन्हैया बुलबुले की तरह उठ कर ग़ायब हो जायेगा या सुर-असुर की लड़ाई के चक्रव्यूह को भेदनेवाला महारथी बन कर उभरेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
http://raagdesh.com by Qamar Waheed Naqvi
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  • Pankaj Kumar

    बहुत सटीक विश्लेषण! कहीं मुसीबत न बन जाये कन्हैया?

  • kushal

    नक़वी साहब क्या आप ये कहना चाहते हैं कि जो लोग ” भारत कि बर्बादी तक जंग रहेगी जारी ” भारत तेरे सौ टुकड़े होंगे ” हर घर से अफजल निकलेगा , अफजल तेरे अरमानो को हम पूरा करेंगे ” जैसे नारे लगाने वालों को खुली छूट दे दी जाये कि वो और अफजल गुरु तैयार करें ? क्या अभिव्यक्ति कि आज़ादी का ये दुरूपयोग नहीं है ? क्या ये सच नहीं कि किसी जुलूस के नारे पहले ही तय कर लिए जाते हैं ? उस जुलूस का एजेंडा पहले से तैयार होता नहीं होता है ? कन्हय्या उस जुलूस को लीड कर रहा था तो वो कैसे बेगुनाह है ? चाहे उसने खुद नारे नहीं लगाए हो लेकिन उसने दूसरों से तो नारे लगवाये थे . क्या वो बेगुनाह है ऐसे कैसे हो सकता है ? कोई भी नहीं मान सकता कि जो लोग नारे लगा रहे थे उनको कन्हय्या नहीं जानता . वो कितना भी शातिर हो लेकिन कानून उसे नहीं छोड़ेगा .आज वो बोल रहा है कि उसे ग़रीबी से आज़ादी चाहिए तो ये बताइये कि अगर उसके माँ बाप ग़रीब हैं तो क्या उसमें नरेंद्र मोदी . आरएसएस या बीजेपी ज़िम्मेदार है ? उसके लिए कांग्रेस . लालू यादव , और नितीश कुमार ज़िम्मेदार हैं क्योंकि बिहार में कभी भी बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा .वो उनको कुछ क्यों अंहिं बोलता ? इसका अर्थ ये हुआ कि केंद्र में विपक्षी दलों का मोहरा है . वो केंद्र को विकास के कार्यों को रोकना चाहते हैं . कन्हय्या को मोहरा बना कर .लेकिन देश कि जनता बेबकूफ नहीं है . देश कि जनता चाहती है कि कन्हय्या और उसके साथियों को जो नारे लगा रहे थे उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिले . मुझे आश्चर्य हो रहा है नक़वी जी कि आपने कभी भी केंद्र के अच्छे कार्यों की सराहना नहीं की वल्कि आपने हमेशा कांग्रेस और अन्य भ्रस्टाचारियों का समर्थन किया . क्या ये निष्पक्ष पत्रकारिता है ? अगर कन्हय्या या आपको या किसी अन्य देशवासी को कोई शिकायत है तो उसकी ज़िम्मेदार कांग्रेस सरकार है जिसने साठ सालों तक देश पर राज किया और उसके बाद भी देश में आज भुखमरी , बेरोज़गारी है . क्या जो गढ्डा साठ सालों में खुदा है उसे NDA सरकार अपने सात सालों के शासन में भर सकती है ?

    • Hindu

      जब देश मे सब कुछ सामान्य चल रहा होता है तो नक़वी जी और अन्य मोदी विरोधी लोग असहिष्नुता से बुरी तरह बेचैन रहते है मगर जब राष्ट्र विरोधी नारे लगते है तो वो इन्हें बिल्कुल सामान्य और क्षम्य बात लगती है| भारत तो हिंदुओं का देश है ही फिर उसे हिंदू राष्ट्र घोषित करने मे नक़वी जी और समान विचार वाले लोगों को दिक्कत क्या है ? 56 मुस्लिम देशों ने खुद को मुस्लिम राष्ट्र घोषित किया तो कोई problem नहीं मगर सिर्फ़ एक हिंदू राष्ट्र घोषित होने पर RSS/BJP पर इतना दोषारोपण क्यों ? विरोधी लोग वैचारिक रूप से दिवालिया है|

      • अलाउद्दीन अंसारी

        अगर भारत हिन्दू का देश है तो मुस्लिम का कौन सा देश है । सिख का कौन-सा देश है, ईशाइ का कौन सा देश है, पारसी, जैन,बौद्ध, क्या आप चाहते है कि देश टुकड़ा हो जाए, यही RSS का प्लान है

        • Hindu

          Hindus are the ORIGINAL people of India. When we Hindus have no problem in 56 muslim countries declaring them as Islamic countries what’s the problem to you when we tell that India is the country of Hindus. Christian countries declare their nation as Christianity then why can’t we. Sikhs, Jains and Buddhists have Hindu origin and they NEVER oppose Hindu nation. Learn from them. Sikhs are 2% of the population but they are so patriotic that they constitute more than 30% in the different wings of defence but you muslims are about 30% percent in population but less than 2% in defence. This is how much you are interested about India. Business is the backbone of economy of muslims in India otherwise you people are EXTREMLY backward in all other field. Tell me a single country among the 56 muslim countries that is well advance in science and technology. Is any one doing any work in Space Research. Just busy in JEHAD RESEARCH !!! India being a single hindu country raised the world’s largest voluntary organization called RSS but you muslims inspite of having 56 countries couldn’t produce any such organization to help you when your community is in danger. Sooner or later India will be declared a Hindu Nation. Jai RSS !!!

          • अलाउद्दीन अंसारी

            ऐ आप की आपनी सोच हो सकता है कि मुस्लिम ने तरक्की नही किया,हम उन जेहादी को मुस्लिम नही मानते, विश्व की राजनीति है। रहा बात भारतीय मुस्लिम का तो हम कही विदेश से नही आए है। हम इसी भारत के है। हा हमारे पूर्वज ने इस्लाम धर्म को सही माना तो हम आज मुस्लिम है, और मुस्लिम होने से मेरा अधिकार खत्म नही हो गया।

          • Hindu

            You did not accept Islam willingly. You were forcefully converted according to the rules of so called Holy Quran. The best example is the fifth Guru of Sikh religion Guru Arjun Dev who was tortured to death in Chandni Chowk of Delhi by Aurenzeb for not accepting Islam. Again the two children of last Guru (10 th) one of Sikh were live buried by your so called “Holy and Peace loving Religion Islamic” ruler for not accepting Islam in the Royal Court . Many people along with the children’s grandmother was present there to see the horrible scene. But unlike you cowards those children choose death rather than accepting the horrible Islam religion. Seeing that her grandmother got heart attack and died. Every year Sikh community celebrates the death anniversary of their 5th Guru and also of those two children of the 10th Guru who sacrificed their life. Also, the 10 th Guru Govind Singh himself was killed by his own 2 muslim students who he had taught from childhood. While Guru was sleeping they attacked him with dagger which ultimately led to his death. Thus, the whole family of the last Guru along with his two children were killed by MUSSALAM + IMAAN (Really Lot of Imaan !!!).
            Don’t you know all these things ? I am not giving examples of Hindu religion but of Sikh religion so that you can realize that Islam is the enemy of every religion (all Kafirs). You can verify my post from any Sikh person. Tell me a single example when any Hindu, Jain, Sikh, Buddhist has forcefully converted any muslim to hindu .
            Now one simple thing I want to tell is that Jain, Sikh, Buddhist are Hindus by culture, they differ just by name. They never oppose India being declared as a Hindu country. Unlike muslims, these Jain, Sikh, Buddhist are vote banks of BJP and happily vote for it. Realize that there is very less difference between Jain, Sikh, Buddhist versus Hindus.
            At last one more thing. Why your so called HOLY QUARAN not displayed on TV. Because all non-muslims will come to know that its every page tells to kill the Kafirs. Rape all the “Maal E Galimat”, break all BootKhanas, by doing Jehaad Muslims will get the degree of Mujahiddin, Gazi and at last 72 “Hurs” in heaven. Several more points to write but I think this is enough. Tell me a single line in Hindu Ramayan, Mahabharat, ….. which tells to kill or enslave non-hindus. I GUARANTEE, today itself I will quit Hindu religion and adopt Islam. That’s the over confidence I have !!! The harsh fact is that you people are mental and physical slaves of Islam and Quran !!!

          • अलाउद्दीन अंसारी

            इस्लाम मे भी किसी को मारने की इजाजत नही देता, खासकर धर्म परिवर्तन के लिए । रहा सवाल अन्य धर्म से लोग मुस्लिम क्यो हो जाते है? तो एक वार कुरान को दिल से पढिये कोई पक्षपात नही उसके बाद आप कहिये । आपने दिल पर हाथ रख कर कहिये इससे अच्छा कोई और पुस्तक है जो हमे सिधा राह चलने को बताता है ।

          • Hindu

            आप खुद भी भली भाँति अपने क़ुरान के बारे मे जानते है| एक बार फिर से “Revision” हो जाए| आज के सभी हिंदू इतने बेवकूफ़ नहीं जो कूरान शरीफ की “खौफनाक शराफ़त” ना जानते हो:

            क़ुरान और इस्लाम की कुछ terminology:

            1. काफ़िर = जो लोग इस्लाम को नहीं मानते|

            2. मोमिन = जो लोग इस्लाम को मानते है|

            3. जेहाद = इस्लाम को जबरन फैलाने के लिए कत्लेआम|

            4. मुजाहिद = वैसे लोग जो जेहाद करते है|

            5. ग़ाज़ी = वैसे लोग जो हिंदुओं का कत्ल करने मे सफल होते है|

            6. माल-ए-गलीमत = हिंदुओं से लूटी गयी औरत|

            7. मर्द-ए-मोमिन = जो लूटी गयी हिंदू औरत का बलात्कार करता है|

            8. हरम = वह खास इमारत जिसमे हिंदुओं से लूटी गई औरतों का 24X7 बलात्कार किया और करवाया जाता है| Free Entry – No Pass, Permit, License etc. required.

            9. बुत-शिकन = बुत यानी मूर्ति, शिकन यानी तोड़ने वाला| जो मंदिर की मूर्ति तोड़ते है|

            10. जजिया Tax = वह अतिरिक्त tax जो सिर्फ़ हिंदुओं को उनके हिंदू होने के कारण देना पड़ता था| हज़ारों वर्षों तक हिंदुओं को यह बोझ सहना पड़ा|

            11. अल-तकिया = पहले दोस्ती करके भरोसा जीतो और फिर पीठ मे खंजर मारो|

            12. जन्नत मे 72 हूर = वैसे मुसलमान जो हिंदुओं को मारने मे खुद शहीद हो जाते है उन्हे स्वर्ग मे 72 अप्सराएँ से शरीर-संबंध बनाने का सुख हासिल होता है|

            13. गजवा-ए-हिंद = भारत पर इस्लामी झंडा लहराने का स्वप्न / लक्ष्य|

            14. दारूल- हरब = हिन्दुस्तान काफिरो का देश है|

            15. दारूल-उलूम = हिन्दुस्तान को मोमिनो (मुसलमानो) का देश बनाना है|

          • Rao Swan

            stupid guy, Hindu are not the original people, Hindu are the Duplicate people.( If you don’t know how to write a comment in English then try in Hindi) Stupid guy you should like this ” Hindu is the ‘original inhabitant’ people of Inida. Then you have to prove it. then you have to tell ‘WHO IS DRAVIDIAN? Then you have to clarify about the Scheduled tribe people. Then you have to explain about the Indus valley civilization. Stupid guy first read then write. You are not came out from the reservation class? then why your history is so poor? You are not living in Saudia arabia. India is a democratic country and ruled by Indian constitution. So stop this non sense talk.

          • Hindu

            Just control your tongue you bloody rascal !!! I too have read histrory. I know about Dravidian, Aryans, Huns, Kushans, Shakas and all those ancient communities. I used the word Hindu because all these communities are today known as Hindu. These communities, lived in India and mixed in Indian culture and never forced their own SPECIFIC culture.
            People like you think upper cast are the greatest enemy of scheduled casts. There are many upper cast people who greatly respect Dr. Bhim Rao Ambedkar. He has done great work for the upliftment of the extremely backward sections of the society. Unfortunately, in villages caste system in still existing which getting removed by the efforts of RSS. RSS knows that caste system and untouchability is the greatest hinderance in the progress of India.
            राष्ट्र-कवि दिनकर ने अपनी जगत प्रसिद्ध रचना रश्मिरथि मे लिखा है: – “धँस जाएँ वो देश अतल मे गुण की जहाँ नहीं पहचान, जाति-गोत्र के नाम पर आदर पाते जहाँ सुजान” |
            In metro cities caste system is only limited to marriage. Even inter-caste marriage is also becoming common day by day. I too greatly OPPOSE caste system. In metro cities people are busy in doing their work, especially in PRIVATE Sector, where the MERIT is the only identity of a person and not his caste. When people have lot of free time then they spent time in criticizing each others caste and creed. South India is more developed compared to north India because people don’t waste time in such cast based issues. Reservation of SC/ST is there in south India but that much hatred feeling among various casts is not there. I am sure a STUPID person like you has never lived in south India or has occasionally visited south India.
            Muslim invaders pesecuted not only upper Hindu casts but also the lower casts. That persecution is happily forgotten by lower casts but persecution by upper hindu caste to lower hindu caste in very clearly remembered by every people of such community. This is very strange.
            Today there are special Harizan Police Stations for lower caste. Punish all those who are persecuting these communities.
            At last one more thing to prove that if Hindu population declines in a particular region of our country then what happens:

            1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में और 1990 से जम्मू-कश्मीर में लागू AFSPA [Armed Force Special Power Act] कानून के तहत सुरक्षा बलों को किसी भी संधिग्ध व्यक्ति देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है।

            Lakhs and lakhs of armed forces are deputed in these states to control the situation. Otherwise these states will demand their separation from India. These states need AFSPA because hindus are in minority and muslims/christians are in majority. Don’t you know this ?? Are you living in Saudi Arabia. Don’t you know the ill fate of these states and the eminent threat that is hanging upon India.
            If you are a TRUE person tell me a single HINDU dominated state in India where there is there is such SPECIAL RULE or HEAVY DEPLOYMENT of army to protect the muslims or lower casts of Hindus.
            You, and your favorite writer Qmar Naqvi can never think/write/justify the necessity of AFSPA law in Muslim/Christian dominated states of India.

          • Rao Swan

            you rascal, if you know the history, then By forcefully you will call them Hindu? then really you are stupid. Indian is divided into caste. you Mr forcefully called Hindu to all, even to Sikhs and Buddhist. So fresh your mind and think, I am not Hindu and will never be think like that. Ok Mr. and the caste are not exist unfortunately, its the integral part of the Hindu system and now all the downtrodden completely fed up of this bloody injustice system and you are talking about RSS, So i read your mind, you and your RSS forcefully doing all this to call Hindu to everyone who lives in India. I am an Indian first and at last I am an Indian( This all said by Dr,Ambedkar) can you follow this? leave the RSS. I am living under the shadow of the Indian Constitution which the RSS want to change. So untouchability and casteism is the big blot on India. RSS and the so called high caste will not change this, its suits to the higher caste, the people’s who suffered will change this bloody system.

            at the end Mr Hindu, just change your style of writing, you started your words with Rascal, the in return what you got? This is the third law of Newton. got it

          • Hindu

            रे मादरचोद !!! मैं अलाउद्दीन अंसारी से बात की उन्होने और ना मैने कभी अपशब्दों का प्रयोग किया| तू बहेनचो द बीच मे टपक पड़ा और कई बार मुझे STUPID कहा| तू चाहता तो शालीनता से भी बात कर सकता था| तो जब तूने गाली गलौच की शुरुआत कर दी है तो तुझसे तर्कों पर नहीं अब गाली ही सुनेगा| रंडी की औलाद तू और तेरी बिरादिरी बड़े लोगों की नाजायज़ पैदाइश है| जिस तरह अमीर लोग खाना खा कर झूठन नाली मे फेंक देते है उसी तरह तेरी जैस मादरचोद बिरादिरी को नाजायज़ पैदा कर रोड पर फेंक दिया गया| बहिनचोद तू और तेरे जैस लोगों के पास ऐसी कौन सी polictical पार्टी है जो BJP या RSS का मुकाबला कर सकती है ? जा पहले ऐसा को संगठन खड़ा कर जो टक्कड़ दे सके| OPEN CHALLENGE to people like you. मुसलमानों की गाड़ चाटने से भी कोई ऐसी पार्टी खड़ी नहीं हो सकती जो राष्ट्रिए स्तर पर BJP/RSS का मुकाबला कर पाए| बपचोदि तेरा खानदान भी रात दिन मुसलमानों से चुदवाना शुरू करेगा तो भी इतने मादरचोद पैदा नहीं होंगे की National Politics मे BJP को टक्कड़ दे सके| तेरा नाम ही swan है जिसका मतलब कुत्ता होता है| बहुत सोच समझ कर तेरा नाम रखा गया| या फिर कुत्तों की ही पैदाइश है तू ? भड़वे साले अब जबाब दे ताकि तेरी माँ-बहन को फिर से अच्छे से चोद सकू| गालियों की कई नयी खेप तैयार कर ली है तेरे जैसे बहनचोदो के लिए|

          • Rao Swan

            Hi Outsider, you shows that which background you are coming. So read the history again you are the child of the Muslaman family. when Islam invader invaded India then they scolded and raped Hindu women and you are the illegitimate child of that incident. So leave and think you are the people who are blot on India and you are the outsider, India is ours. go back to you country.

            and once again whatever you are. either Hindu or the child of Muslaman. you insulted the entire communities and your all matter I am going to forward the SC/ST commission and they will find you easily and trace your fake identity.

          • Hindu

            मैं फिर से ये बात जोर देकर दुहराना चाहूँगा कि अपशब्दों का प्रयोग तू ने शुरू किया| कई बार मुझे STUPID कहा| मेरे और मियाँ अलाउद्दीन अंसारी के बीच के वार्तालाप को फिर से एक बार पढ़ ले| कहीं भी दोनों तरफ से गाली-गालोंज नहीं हुई है| जो लोग सम्मान देकर बात करने है वो उसी प्रकार सम्मान से उत्तर भी पाते है| Social Media मे अपनी भावना को रखना चाहते हो तो पहले STUPID जैसे अपशब्दों को भूल जाओ|

            और ये गीदड़ भभकी मत दे कि SC/ST court/commission मे जा रहा हूँ| तेरे POST से अपशब्दों का शुरुआत हुई है| न्यायकर्ता सिर्फ़ मेरे post को नही पढ़ेंगे बल्कि शुरुआत करने वाले को ही ज़िम्मेवार ठहराएँगे|

            अंत मे फिर से 2 बातें स्पष्ट कर दूँ:
            (1) आक्रमणकारी मुसलमानों ने जिनका बलात्कार किया उससे पैदा हुए नाजायज़ संतान मुसलमान ही बने ना कि हिंदू| The best example is the 1971 war of Bangladesh and Pakistan where 5 lakh women were raped and as a result more than 70000 babies were born. All the born children were MUSLIMS and “NOT” Hindus [although every community was raped including ours and yours (Mr. Rao Swan)).

            (2) हिंदुओं के एकमात्र देश हिन्दुस्तान ने इतना बड़ा संगठन RSS खड़ा किया जो आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन है| खुद Guinness World Record भी इसे विश्व का सबसे बड़ा संगठन मानता है| 56 मुस्लिम देश और सैकड़ो christian देश भी मिलकर आज तक इतना बड़ा संगठन खड़ा नही कर पाए तो तू और तेरी जैसी सोच रखने वाले किस खेत की मूली है ?

          • Rao Swan

            Mr Hindu, Leave the issue of true hindu or fake hindu? Issue is that India is divded into bloody casteism. and you are not the one who never considered the caste is a big evil and more than 100000 lakh atrocities done on the name of caste and bloody you are talking about Hinduism. Its a complete genocide on the name of Casteism.

          • Rao Swan

            Mr Hindu, leave the Qmar Naqvi, or I dont know who is tha guy? I am talking about casteism. this is the ugliest and bloody hell system of the Hindu religion. and you told in South India the situation is not like that. Can i give you the figure? how the upper caste treated the lower caste people?

          • Rao Swan

            Mr. Hindu every day people belongs to SC/ST faced severe torture,humiliation, In Haryana state ruled by the BJP, upper caste lobby raped the SC women and culprit freely moved after crime. In Orrisa can you tell me the position of Kalahandi? So stupid guy. dont close your eyes from the real fact. who made this bloody hell casteism. that would be the really a most stupid and insane person of the world. bury this bloody system which is full of injustice.

    • महेंद्र

      पहले तो ये स्पष्ट कर दें की क्या ६० सालों में कुछ नहीं हुआ ? १९४७ के जिस दौर से आगे बढ़ कर भारत २०१४ में मोदी को मिला है क्या वो भारत १९४७ वाला है.? जितना होना चाहिए था उतना नहीं हुआ कह सकते हैं पर जो मोदी कह रहे हैं वही आप कह रहे हैं की ६० सालों में कुछ नहीं हुआ. ये भी कह सकते है की शाशन प्रशाशन में जो लोग थे वो भी नाकारा और निठल्ले थे जिन्होंने किसी योजना का सफलता से लागु ही नहीं किया . नेहरु इंदिरा शाश्त्री राजीव सब लोग बस विदेश घुमा करते थे .
      और आज ६७ साल बाद पहली बार जनधन योजना लागु कर मोदी ने ६० साल के गड्ढे भर दिए .
      मोदी गुजरात में १२ साल रहे , क्या वहाँ से गरीबी खत्म हो गयी, पहले अपनी राय पर विचार कर लें फिर किसी पर आरोप लगाएं

  • Very brilliant article.
    Every action will have an equal and opposite reaction…!

  • अंशुमन तिवारी

    नक़वी साहब ऐसा लगता है आपने भी उसे अपना हीरो मान लिया है। लेकिन मेरा आपसे एक सवाल है, आप बुजुर्ग है हमसे और सम्भवतः आप देश के विकास के हर पड़ाव से भली भांति परिचित होँगे और शायद मेरे हर प्रश्न का उत्तर आप जरूर देंगे। प्रश्न ये है की क्या आपको नहीं लगता की ये एक दूसरे केजरीवाल का जन्म है? जो व्यक्ति स्वराज आंदोलन से आया था,लोगो को बहूत उम्मीदें भी थी लेकिन हस्र हम सव के सामने है।उसी की तरह कन्हैया का भी जन्म हुआ है देश की राजनीती में जो देश में गरीबो की बात कर रहा है दबे कुचले लोगों की बात कर रहा है। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है की गरीबो की इस दुर्दशा के जिम्मेदार लोगो की पहचान कन्हैया ने कैसे की? बार बार मोदी पे ऊँगली उठाना,वर्तमान सरकार को कोसना क्या यही उम्मीद हम उनसे करे? कांग्रेस ने देश में 50 साल से ज्यादा शाषन किया और उसी के शाषनकाल में गरीबो की दुर्दाशा हुई, नौकरशाही अपने चरम पे थी,घोटाले पे घोटाला हो रहा था संभवतः कन्हैया उस समय भी JNU में थे लेकिन तब न तो आज़ादी के नारे लगे न ही गरीबी उन्मूलन का स्वांग रचा गया। वो बिहार के रहने वाले है लेकिन बिहार की दुर्दशा के जिम्मेदार लोगो के ऊपर एक बार भी उंगली नहीं उठाई वहां भी गरीबी का आलम ये था साहब की मुसहर जाति के लोग चूहे खा कर किसी तरह ज़िंदा थे शायद आज भी उनकी यही स्थिति है।लेकिन आपके हीरो को बिहार जाकर उनके लिए आज़ादी मांगने की फुरसत नहीं है,वो दिल्ली में रहकर सरकार द्वारा दी जा रही सब्सीडी के बल पर गरीबी उन्मूलन में अपना योगदान देंगे या यूँ कहे की गरीबों की लाश पर राजनीती करेंगे। नक़वी साहब, देश का इतिहास गवाह है की वामपंथियो ने बंगाल का क्या हस्र किया और वाम दाल कांग्रेस के सहयोगी भी रहे पिछली सरकारों में तो कन्हैया ने मोदी को जिम्मेदार कैसे मान लिया जिसको बस दो साल ही हुए है देश की सत्ता में आये हुए? आशा है आप मेरे सवालो का जवाब जरूर देंगे।

  • Rao Swan

    Well done Naqvi Sahib for your well nurtured article, No doubt I will never support to CPI or CPM., for various reasons but i always do favor and will stand for those parties who speak for democratic values and fight for the social and economical rights of the common people. Kanhayia speech is marvelous but he is in wrong party. The party who ruled West Bengal for 30 years but did nothing for the common people. So on the name of Patriotism,Nationalism no one can made befool the common people for last long. I am the firm and adamant supporter of Baba Sahib Ambedkar who really warned the Indian upper caste lobby that do justice on social level also,otherwise ………? democracy would be in peril

  • ghari

    हमारा वोट काम आया आपकी बेचैनी बता रही है

  • अलाउद्दीन अंसारी

    सविधान का सच्च ……
    पेज न.132 :-
    15 अगस्त 1947
    पार्टिशन के बाद जो मुस्लिम अपनी इच्छा से भारत में रहना चाहता है बा इज़्ज़त भारत में रह सकता है क्यों की ये वो मुस्लिम है जिनके पुर्वजो ने भारत की आजादी में पूरा पूरा योगदान दिया और भारत के लिए बलिदान दिया ।
    पेज न 156 :-
    आरएसएस देश का सबसे बड़ा दुशमन है क्युकी इस संघठन ने भारत की आजादी के वक्त तिरंगा जलाया था और माहात्मा गाधी का हत्यारा आरएसएस पार्टी का नेता था और आरएसएस पर बैन लगाया ।
    1956 में जब आरएसएस पर से बैन हटाया तब कुछ शर्ते रखी वो शर्ते ये है की आरएसएस कभी भी राजनीती पार्टी में भाग नहीं लेगी सविधान में कभी शामिल नहीं होगी देशभक्त पार्टी कभी नही बनेगी सिर्फ एक संगठन ही चलाएगी ।
    पेज न 197 :-
    1971,
    370 धारा , कश्मीर का भारत में विलय यानि भारत देश में शामिल होना कश्मीर एक आजाद देश था जिसे पाकिस्तान अपने देश में शामिल करना चाहता था इसको भारत में शामिल करने के लिए कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया यानि 370 धारा ।
    और अब ये 370 धारा क्या है ?
    और कश्मीर में क्यों लगी है ?
    और क्यों नहीं हट सकती ?
    370 धारा में ये है की कश्मीर में 6 साल का कार्यकाल है कोई भी व्यक्ति कश्मीर की लड़की से शादी कर के वहां की नागरिकता पा सकता है कश्मीर के अलावा बाहर का कोई भी इन्सान वहा पर जमीन नहीं खरीद सकता कश्मीर के पास केंद्र के सभी अधिकार है रक्षा और सूचना मंत्रालय छोड़ कर ।।
    हस्ताक्षर :-
    मोहम्मद अली जिन्ना ,
    पंडित जवाहर लाल नेहरु ,
    इंद्रा गांधी,
    जरनल गेरी रिच्ल्ड ।।
    ये सब साफ़ साफ सविधान में लिखा है।
    फिर भी भगवा पार्टीयां मुस्लिमो को गद्दार समझती हैं और आरएसएस को देशभक्त पार्टी समझति है ।।

  • kushal

    कैसे समय का चक्र परिवर्तन लाता है यह उदाहरण आज जे.एन.यु. के रूप मे हमारे सामने है। जिस विश्वविधालय ने देश को कईं नेता दिए,आज उसी विश्वविधालय मे देशद्रोही पैदा होने लगे,परन्तु फिर दिमाग विश्लेषण पर जाता है और एक स्थान पर आकर ठहरता है कि क्या जे.एन.यु. नाम की ईमारत देशद्रोही पैदा कर रही है,या फिर उस परिसर के अंदर की व्यवस्था इन देशद्रोहियो की जननी है?,मेरा मानना तो ये है कि देशद्रोही पैदा करने मे कोख की नही बीज की ज्यादा अहम भूमिका होती है।

    विश्वविधालय परिसर जहां एक कोख के समान होता है वहीँ बीज से मेरा संकेत वहां की शिक्षण प्रणाली से है। प्रत्येक कोख मे समानता होती है परन्तु प्रत्येक बीज मे समानता नही होती,यह बात सिद्ध भी की है जे.एन.यु. ने। प्रत्येक विश्वविधालय मे शोधार्थियों को एक समान सुविधाएं मिलती हैं,परन्तु उनको मिलने वाला दिशा निर्देशन प्रत्येक स्थान पर भिन्न होता है। जे.एन.यु. की ईमारत से,उस परिसर से मुझे कोई एतराज नही,परन्तु वहाँ पर क्या सिखाया जा रहा है इस पर अब सवाल करना बनता है। यदि वहाँ पर ऐसा बीज है जो देशद्रोहियो को जन्म दे रहा है तो आवश्यकता है उस बीज को समाप्त करने की। जे.एन.यु. मे घटित विगत घटनाक्रम संकेत कर रहा है कि राष्ट्र को तो तब आगे ले जाओगे जब राष्ट्र से प्रेम करने वाली पीढ़ी का निर्माण करोगे,और इसके लिए आवश्यकता है की कोख मे ऐसा बीज हो जो देश प्रेमी सन्तान का निर्माण कर सके।

    स्पष्ट शब्दों मे यही बात की जाये तो यह साफ है कि शिक्षा परिसर का नही दोष दिए जा रहे शिक्षण का है। जिस संस्थान के प्रोफेसर ही देशहित से अनभिज्ञ हैं वहाँ से देशभक्त पीढ़ी समाज को मिलेगी यह कैसे सम्भव है। तीस वर्ष का कन्हैया इतना भी नही जानता की अपने परिवार के मुखिया का मजाक नही उड़ाया जाता,अपनी माता को गाली नही दी जाती,अपनी माँ का बँटवारा नही किया जाता,अपनी माँ का चीरहरण करने वालो को आदर्श नही बताया जाता,अपनी माँ को जख्म देने वालो को बलिदानी नही कहा जाता,देश को सीमा पर जान हथेली पर रखकर खड़े सैनिकों को गाली नही दी जाती। ये सब मुझे कक्षा 3 तक समझ मे आ गया था,और आज भी किसी भी स्कूल के कक्षा 3 के बच्चे ये सब जानते हैं,फिर कन्हैया को यह सब कैसे याद नही रहा। कन्हैया से फिर एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि गांव मे जो तुम्हारी माँ है,उसको कोई आकर तमाचा मारे तो उसे आदर्श मानोगे,तुम्हारी माँ की इज्जत हाथ डालने वाले के लिए हमदर्दी रखोगे,उस दरिंदे को अगर गांव की पंचायत मौत की सजा दे तो उस पंचायत को कातिल मानोगे,तुम्हारी माँ की रक्षा करने वाले अपने भाई को भी बलात्कारी कहोगे,और इसके बाद अपने गांव का बँटवारा भी करोगे? अच्छा नाम गंवाया कन्हैया,क्योंकि इसे नाम कमाना नही कहा जा सकता और यदि तुम्हे ऐसा लगता है तो ये तुम्हारा भ्रम है। हो सकता है कि जे.एन.यु. के अंदर जो सपोले है उनके बीच तुम्हे ऐसा लग रहा हो की तुम्हारी जयकार हो रही है परन्तु वास्तविकता यह है कि पूरा देश तुम्हे लानत दे रहा है। कन्हैया को लगता है कि मोदी जी उसके खिलाफ है,केंद्र सरकार उसके खिलाफ है,क्योंकि वो कन्हैया के राजनीतिक कौशल से घबरा गए हैं,कन्हैया को लगता है कि उस दिन जे.एन.यु. मे जो हुआ उससे सरकार को कोई नुकसान होना था,नही कन्हैया। उस दिन जो तुमने किया वो देशद्रोह था इसलिए मोदी जी तुम्हे अपने विरोधी दिखे,सरकार तुम्हे अपनी विरोधी दिखी और तुमने उन्हें अपना विरोधी कहा भी,परन्तु तुम चूक गए इस देश की जनता को अपना विरोधी कहने से, जबकि जनता भी तुम्हारे विरोध मे ही तो थी और आज भी है। सच ये है कि मोदी जी तुम्हारे नही,तुम्हारे दुष्कृत्य के विरोधी हैं,सरकार तुम्हारे देशविरोधी विचारो की विरोधी है, सम्पूर्ण भारतवर्ष मे सिर्फ तुमसे दुश्मनी ऐसा सम्भव नही हो सकता।

    एक और शर्मनाक परन्तु बेहद गम्भीर बात,हम सभी जानते हैं कि सत्ता पक्ष और विपक्ष हमारे देश की लोकतंत्रात्मक शक्ति के दो स्तम्भ हैं जहाँ सत्ता पक्ष की किसी लोक विरोधी नीति का विपक्ष विरोध करता है। परन्तु आज के मुख्य विपक्षी दल के उपाध्यक्ष को लगता है कि विपक्ष का कार्य सत्ता पक्ष के प्रत्येक कार्य का विरोध करना है,शायद इसीलिए सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओ के खाने पीने पहनने तक पर वो संसद मे विरोध दर्ज कराते हैं,विषय को ना भटकाते हुए कहना चाहूँगा कि किस आधार पर यें साहब देशद्रोही कन्हैया और उसके देशद्रोही साथियो के पक्ष मे खड़े हो गए थे,कहीं इसलिए ही तो नही की हम तो विपक्ष हैं,हमे तो विरोध करना ही है। कुछ देर के लिए आपको एक मुख्य पार्टी का उपाध्यक्ष ना मानते हुए लानत दे दूँ तो बुरा मत मानना,आपके काम ही ऐसे हैं। लोक विरोधी नीतियों का विरोध करो जनाब,किसी पार्टी का या मोदी जी का विरोध ये दर्शाता है कि आप जनता के निर्णय का सम्मान नही कर रहे। इन बेअकलो जैसे कृत्यों को छोड़कर कुछ तो परिपक्वता दिखाइये। खैर आप नही समझेंगे,और ‘आप’ वाले भी नही समझेंगे।

    मुझे तो बस इतना ही कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी से यह अर्थ बिल्कुल ना लगाया जाये की हम किसी सीमा मे बंधे ही नही हैं,हमारे माता पिता यदि कभी कुछ गलत करें तो हम उनको उनकी गलती बता सकते हैं,गाली नही दे सकते।

    ये भी मैंने बचपन मे ही सीखा था,राहूल गांधी जी,केजरीवाल जी,नीतीश जी और भी सभी सम्मानीय जो अब सम्मान योग्य नही रहे।

    “अंधे होकर लड़ते रहना,अज्ञानियों का काम है,

    दुःख ये है कि अंधे होकर तुमको लड़ना आता है।

    किसी दल से ना नफरत है,नही किसी से बैर मुझे,

    पर ये सच है कि सच कहना ही मुझको भाता है।।”

  • Chanchal

    नक़वी साहब, अभी का जो माहौल हैं इसपे मेरी ये अभिव्यक्ति हैं सायद आप सब को पसंद आये

    एक बार हो चुका हैं

    टुकड़े-टुकड़े

    दिल-ए -जां हिन्दुस्तांन का

    बँट चुकी है धरती शरहदों में

    लगता है फिर भी नहीं बदला

    मौसम-ए-हिंदुस्तान का

    जाने कितने माँए रोइ

    कितनो का घर उजड़ा था

    हर ओर तोड़-फोड़ आगजनी

    हर चेहरा नफ़रत का मुखड़ा था

    वर्षो बीत गए

    बदल गया है बहुत कुछ

    जो बदलना था

    बेहद जरुरी

    वो सोच नहीं बदली है

    हिन्दु-मुस्लिम, मंदिर-मस्ज़िद

    अभी भी जारी हैं

    आस्था के प्रतीक ही

    अब आस्था पे भाड़ी हैं

    -चंचल साक्षी

    आप मेरी कवितायों को यहाँ देख सकते हैं. धन्यवाद।
    bit.ly/1q0TBq6

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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है? लखनऊ में रविवार को राहुल-अखिलेश के साझा रोड शो के कुछ राजनीतिक सन्देश बड़े स्पष्ट हैं. एक, यह महज़ उत्तर प्रदेश का चुनावी गठबन्धन नहीं है, बल्कि 2019 का विपक्षी राजनीति का रोडमैप है. यानी गठबन्धन को लम्बा चलना है.

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