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Jan 04
आम राज्य का आमबाण!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 3 

यह विशुद्ध ढोंग हो या सच्चाई, 'आप' के विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक अब तक लगातार 'आम आदमी' की शक्ल मे नज़र आये हैं. ग़रीबों की बिजली-पानी से लेकर रैन-बसेरे तक पहली बार सब सरकार की चिन्ता में पहले नम्बर पर दिखे. मफ़लर-स्वेटर वाले मुख्यमंत्री का हुलिया जस का तस रहा. बिलकुल मामूली! यह दृश्य सच्चा हो या झूठा, असली हो या नयी राजनीतिक नौटंकी, लोगों की आँखों को यह सब बहुत सुकून दे रहा है.


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AAP Govt. | क़मर वहीद नक़वी | New Experiment of Governance in Delhi |

तो दिल्ली में आख़िर आम राज्य आ ही गया! रामराज्य के बारे में सुना था, अब आम राज्य देख रहे हैं! 'मैनगो पीपुल' यानी हिन्दी में आम आदमी विधानसभा के अन्दर! क्या नज़ारा था! उन्हें सिखाना पड़ा कि सदन में तालियाँ नहीं बजाते हैं, मेज़ें थपथपाते हैं! वो सदन में शपथ लेने आये तो आम आदमी की टोपी लगा कर बैठ गये. उन्हें बताना पड़ा कि सदन में कोई किसी पार्टी का झंडा, बिल्ला, निशान लेकर नहीं बैठ सकता! इस 'मैनगो पीपुल' के लिए तो शशि थरूर वाला 'कैटल क्लास' भी ताजमहल जैसी फ़ैंटेसी से कम नहीं! सो यह जब अपने सचमुच के तबेले से निकल कर पहली बार 'बाअदब, बामुलाहिज़ा' वाले दरबार में गद्दीनशीन हुआ, तो ऐसी अचकच में फँसेगा ही!

Game Plan behind Congress' Eagerness to Support AAP Govt.

काँग्रेस के  विश्वास मत का घंटा!

लेकिन अचकच में सिर्फ़ वही नहीं फँसा है. सबके सब फँसे हैं. वह किसी से समर्थन माँग नहीं रहा, फिर भी काँग्रेस (Congress) ने विश्वास मत का घंटा उसके गले बाँध दिया. बच्चू, अब कम से कम छह महीने तो तुम्हें सरकार चलानी ही पड़ेगी! तब पता चलेगा आटे-दाल का भाव! खुल जायेगी तुम्हारे आम राज्य की सारी पोल! यह काँग्रेस (Congress) का शुरुआती गेम प्लान था कि कैसे भी 'आप' (AAP) को सरकार बनाने के कीचड़ में घसीटो.

प्लान अब भी वही है, लेकिन गोलपोस्ट बदल गया है. 'मैनगो पीपुल' मुनादी पीट-पीट कर काँग्रेस (Congress) को धमका रहा है कि तुम्हारी पिछली सरकारों में जो-जो भ्रष्टाचार हुआ है, सबकी जाँच करेंगे और जो-जो नपेगा, वह जेल जायेगा. लेकिन काँग्रेसी डर नहीं रहे. वह ख़ुशी-ख़ुशी समर्थन की जयमाल डाल कर इतरा रहे हैं. क्यों भला?

BJP Cautiously looking how AAP performs in Delhi?

बीजेपी भाँप नहीं पा रही 'आप' की थाह!

अचकच में बीजेपी (BJP) भी है. 'आप' (AAP) की थाह भाँप नहीं पा रही. और थाह लग भी जाये तो 'आप' (AAP) पर कौन-सा तीर चलाये? भ्रष्टाचार का, शहज़ादे का, इटली का, महँगाई का, चुपमुँही सरकार का, रुकी हुई रफ़्तार का या तुष्टिकरण का, इनमें से कोई भी तीर 'आप' (AAP) पर चलाया ही नहीं जा सकता! बीजेपी (BJP) के भाग्य से एक ही छींका टूटे तो टूटे कि दो महीने में ही 'आप' (AAP) बुरी तरह फ़ेल हो जाये, उसके मंत्री और विधायक ऐसे अनाप-शनाप काम कर दें कि जनता उसको रातों-रात ख़ारिज कर दे!

नौसिखिया 'आप'!

'आप' (AAP) वाले नौसिखिया तो हैं, सदन के सलीक़े तक नहीं जानते या जानने की ज़रूरत नहीं समझते, सरकार का 'स' भी उन्हें पता नहीं, फिर भी ऐसी उम्मीद करना कि दो महीनों में ही उनकी क़लई उतर जायेगी, शायद ख़याली पुलाव से भी आगे की कोई चीज़ हो जायगी! इसलिए बीजेपी (BJP) की परेशानी लाज़िमी है. नमो के अश्वमेध के घोड़ों को अचानक इन 'मैनगो लोगों' को देख-देख कर झुरझुरी चढ़ने लगी है! काँग्रेस (Congress) यही देख-देख कर ख़ुश हो रही है. इसलिए वह सौ-सौ जूते खा कर भी 'आम आदमी' की दासी बनने को तैयार है! क्या हुआ? छह महीने की ही तो बात है. नमो का काँटा निकल जाये, फिर इस मैनगो के बच्चे से निबटते रहेंगे!

AAP Ministers presenting themselves like Real 'Aam Aadmi!'

आम आदमी की आस बढ़ायी

'आप' (AAP) की सरकार ने अपने पाँच दिनों के जीवन में अब तक अपने लाखों नये समर्थक पैदा कर लिये हैं. यह विशुद्ध ढोंग हो या सच्चाई, उसके विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक अब तक लगातार 'आम आदमी' की शक्ल मे नज़र आये हैं. ग़रीबों की बिजली-पानी से लेकर रैन-बसेरे तक पहली बार सब सरकार की चिन्ता में पहले नम्बर पर दिखे. मफ़लर-स्वेटर वाले मुख्यमंत्री का हुलिया जस का तस रहा. बिलकुल मामूली! यह दृश्य सच्चा हो या झूठा, असली हो या नयी राजनीतिक नौटंकी, लोगों की आँखों को यह सब बहुत सुकून दे रहा है. किसी दलित की झोपड़ी में जा कर खाना खा लेने की आयोजित दृश्यावलि के मुक़ाबले यह केजरीवाली छवि लोगों को कहीं ज़्यादा विश्वसनीय, कहीं ज़्यादा अपनी-अपनी सी लगती है.

लम्बे-चौड़े लाव-लश्कर वाले राजनेताओं के दम्भाभिभूत चेहरों की तुलना में बिलकुल अपनी ही तरह हँसने-बोलने, चलने-फिरने वाले मंत्री जी को देखना लोगों को उम्मीद जगा रहा है कि राजनीति की टेढ़ी चाल बदली भी जा सकती है. इसलिए 'आप' (AAP) से सहमति-असहमति अपनी जगह, लेकिन इसमें दो राय नहीं कि 'आप' (AAP) ने आम आदमी की आस बढ़ायी है कि वह आम राज्य का सपना देख सकता है! यह सिर्फ़ चार दिन की चाँदनी होगी या एक स्थायी विकल्प, यह देखना दिलचस्प होगा.

क्या केजरीवाल उम्मीद पूरी कर पायेंगे?

बीजेपी (BJP) के लिए सबसे बड़ी चिन्ता की बात यही है. हाल के विधानसभा चुनावों के बाद उसके हौसले सातवें आसमान पर थे. उसे लगने लगा था कि इस बार अपने नमो ब्रह्मास्त्र से वह लोकसभा में अकेले भी बहुमत हासिल कर सकती है. पस्त पड़ी काँग्रेस (Congress) को बीजेपी (BJP) के ख़िलाफ़ 'आप' (AAP) के आम राज्य का आमबाण मिल गया! 'आप' (AAP) की सरकार बनने के बाद, जैसे-जैसे 'आप' (AAP) को समर्थन बढ़ता जा रहा है, काँग्रेस (Congress) को लगता है कि 'आप' (AAP) के वोट जितना बढ़ेंगे, बीजेपी (BJP) के वोट उतने ही कटेंगे. इसलिए काँग्रेस (Congress) चाहेगी कि 'आप' (AAP) की सरकार अगले छह महीने ख़ूब धूम-धड़ाके से चले. काँग्रेस (Congress) की यह चाल अरविन्द केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के लिए एक सुनहरा मौक़ा है कि वह बेधड़क काम करें. लेकिन काम से ज़्यादा ध्यान उन्हें अपनी पार्टी के लोगों के आचरण पर देना होगा. चुनावी वादे तो कोई भी पार्टी पूरा कर सकती है, लेकिन बड़ा काम होगा कि राजनीति का रास्ता बदले और यह तभी होगा, जब राजनेताओं का आचरण बदले. केजरीवाल (Kejriwal) यह दूसरी उम्मीद पूरी कर पायें, तो कुछ बात बनेगी.

(लोकमत समाचार, 4 जनवरी 2014)


© 2014 http://raagdesh.com by Qamar Waheed Naqvi

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  • arun sathi

    सटीक और गहन विवेचना ….

  • Sir this is not the provision that no confidence motion can not be brought in next 6 months after vote of confidence…… the provision is that there can not be no confidence motion in next 6 month after one is defeated. It was confidence motion, not no confidence motion. Otherwise your language is Maasha Allah kya kahne.
    Regards.

    • admin

      धन्यवाद सेतिया जी.

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स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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