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Society

राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

Social Problems and Issues, Communal and Ethnic biases, Racial Divide, Gender Disparity, Social Justice, Indian Society, Caste Conflicts, Conservative and Fundamentalist Chauvinism, Fanaticism.

सामाजिकसमस्याएँ व मुद्दे, साम्प्रदायिक व जातीय दुराग्रह, नस्ल भेदी विचार, लैंगिक असमानता, सामाजिक न्याय, भारतीय समाज, जातीय संघर्ष, दकियानूसी, पुरातनपंथी व कट्टरपंथी रूढ़ियाँ.

कितनी गाँठों के कितने अजगर?

मन के अन्दर, कितनी गाँठों के कितने अजगर, कितना ज़हर? ताज्जुब होता है! जब एक पढ़ी-लिखी भीड़ सड़क पर मिनटों में अपना उन्मादी फ़ैसला सुनाती है, बौरायी-पगलायी हिंसा पर उतारू हो जाती है. स्मार्ट फ़ोन बेशर्मी से किलकते हैं, और उछल-उछल कर, लपक-लपक कर एक असहाय [..] Read More

जाति रे जाति, तू कहाँ से आयी?

भारत में जाति कहाँ से आयी? किसकी देन है? बहस बड़ी पुरानी है. और यह बहस भी बड़ी पुरानी है कि आर्य कहाँ से आये? इतिहास खोदिए, तो जवाब के बजाय विवाद मिलता है. सबके अपने-अपने इतिहास हैं, अपने-अपने तर्क और अपने-अपने साक्ष्य और अपने-अपने लक्ष्य! जैसा लक्ष्य, वैसा [..] Read More

इस गरमी पर एक छोटा-सा सवाल!

लोग गरमी से मर रहे हैं. अब तक अठारह सौ से ज़्यादा लोग मर चुके. ख़बरें छप रही हैं. लोग मर रहे हैं. सरकारें मुआवज़े बाँट रही हैं. गरमी कम हो जायेगी, लोगों का मरना रुक जायेगा. फिर लोग बरसात से मरेंगे. फिर ख़बरें छपेंगी. फिर मुआवज़े बँटेंगे. फिर कहीं-कहीं लोग [..] Read More

उलटे चाँद के देश में!

जिस देश में चाँद उलटा निकल सकता है, हम उस देश के वासी हैं! बात अफ़वाह की नहीं है, जो अभी आये भूकम्प के बाद फैली और तेज़ी से फैली, लेकिन उतनी ही तेज़ी से ख़ारिज भी हो गयी. बात अफ़वाह के बहुत आगे की है! और बात मामूली नहीं, बहुत गहरी है. इतनी गहरी कि यह आपको तय [..] Read More

क्या होगा, जब आयेगी इंटरनेट की सुनामी?

इंटरनेट धीरे-धीरे युवाओं की अकेली ऐसी खिड़की बनता जा रहा है, जिसके ज़रिए वह दुनिया को, समाज को, अपने आसपास को देखते, जानते, समझते, पहचानते और जाँचते-परखते हैं. उनका पूरा जीवन वर्चुअल स्पेस में सिमट कर रह गया है. शहरों में जैसे ही बच्चे होश [..] Read More

अतीत में जमी जड़ें और भविष्य का पेड़!

 Indian Youth | क़मर वहीद नक़वी | Why so Angry and Restless |
आज कुछ बात सिर्फ़ और सिर्फ़ युवाओं से! कभी सिर्फ़ अमिताभ बच्चन 'एंग्री यंगमैन' हुआ करते थे. वह पुराना ज़माना था. आज तो जितने 'यंग' हैं, सभी 'एंग्री' हैं. चारों तरफ़ ग़ुस्सा ही ग़ुस्सा ही [..] Read More

रोशनी का अँधेरा और सच की चाँदनी!

Diwali Musings | क़मर वहीद नक़वी | The Darkness of Glittering Lights |
यह रोशनी के अँधेरे का दौर है! जी हाँ, कभी-कभी रोशनी भी अँधेरा कर देती है. जब आँखें चौंधिया जायें, तो कुछ भी दिखना बन्द हो जाता है! आँखों के सामने अँधेरा छा जाता है. यही [..] Read More
  
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  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
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मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
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तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है? लखनऊ में रविवार को राहुल-अखिलेश के साझा रोड शो के कुछ राजनीतिक सन्देश बड़े स्पष्ट हैं. एक, यह महज़ उत्तर प्रदेश का चुनावी गठबन्धन नहीं है, बल्कि 2019 का विपक्षी राजनीति का रोडमैप है. यानी गठबन्धन को लम्बा चलना है.

दो, दाँव पर सिर्फ़ एक चुनाव की [..] Read More
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