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राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?

बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ लोग पाँच सौ और हज़ार रुपये के नोटों को रद्द कर देने के बचकाने सुझाव दे रहे हैं (काले धन पर गाल बजाते रहिए, 8 अक्तूबर 2016). मुझे क्या पता था कि सरकार ऐसी [..] Read More

‘सिविल कोड नहीं, तो वोट नहीं!’

परतें खुल रही हैं. धीरे-धीरे. यूनिफ़ार्म सिविल कोड पर अब एक नया सुझाव है. शायद लोगों का ध्यान उधर गया नहीं. लेकिन सुझाव बहुत ख़तरनाक है. और उससे भी कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है उसके पीछे छिपी मंशा. संघ के एक बहुत पुराने और खाँटी विचारक हैं, एम. जी. वैद्य. उनका [..] Read More

यह 2019 की अँगड़ाई है!

यह 2017 की लड़ाई नहीं, असल में 2019 की अँगड़ाई है! हाँ, यह ज़रूर है कि उत्तर प्रदेश का घमासान इसकी पहली प्रयोगशाला होगा. प्रयोग सफल रहा, तो मामला आगे तक जायेगा. वरना बात वहीं की वहीं रफ़ा-दफ़ा हो जायेगी. तीन तलाक़ से छिड़ी बहस के गहरे राजनीतिक अर्थ हैं, जिसे [..] Read More

चुपचाप ‘राष्ट्रवाद’ की धूप सेंकिए!

विकलांग हैं. खड़े नहीं हो सकते. तो फिर या तो सिनेमा देखने मत जाइए और अगर बहुत ही शौक़ हो, जाना ही हो तो साथ में बड़ा-सा साइनबोर्ड लेकर जाइए. सारी दुनिया को बताइए कि आप विकलांग हैं, इसलिए राष्ट्रगान के समय उठ कर खड़े नहीं हो सकते! वरना कोई पढ़ा-लिखा, [..] Read More

इतिहास की दो ‘केस स्टडी’!

अगर मुल्लाओं की चली होती तो पिछले डेढ़ सौ सालों में देश में न कोई मुसलमान बच्चा स्कूल गया होता, न कालेज और न यूनिवर्सिटी! आज न अलीगढ़ मुसलिम विश्विद्यालय होता और न ही हिन्दुस्तान के किसी मुसलमान ने 'अँगरेज़ ईसाइयों वाली' आधुनिक शिक्षा ली होती! ज़रा [..] Read More

काले धन पर गाल बजाते रहिए!

सरकार ने बड़ी मेहनत की. क़रीब सत्तर-पचहत्तर हज़ार करोड़ रुपये का काला धन बाहर आ गया है. सरकार ख़ुश. इतना बड़ा काम हुआ है, इससे पहले इतना बड़ा काला धन कभी बाहर नहीं आया था. देखिए न, मोदी जी ने चुनाव के पहले वादा किया था, तो काले धन पर भी उन्होंने आख़िर [..] Read More

29/9 के बाद पाकिस्तान

तो भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक मैच में नरेन्द्र मोदी ने पहला गोल कर दिया! और सिर्फ़ एक रात में खेल के सारे नियम बदल दिये. वह मैच जो बरसों से अनवरत एक ही ऊबाऊ, थकाऊ, पकाऊ तरीक़े से जारी था, सहसा उत्तेजक हो गया. लोगों को अचानक लगने लगा कि अरे, इस मैच में भी [..] Read More

कैसे सुलझे गुत्थी पाकिस्तान की?

फिर वही यक्ष प्रश्न! पाकिस्तान? उरी के बाद देश फिर ग़ुस्से में है. क्या इलाज है पाकिस्तान का? जवाब तो बहुत हैं. विशेषज्ञों के पास तो बड़े-बड़े समाधान हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की समस्या तो चुटकियों में हल की जा सकती है. लेकिन दिक़्क़त यह है कि यह [..] Read More

चुन लीजिए, आपको क्या चाहिए!

सवाल तीखा है. मौज़ूँ है. सही है. लेकिन जवाब कहाँ से आयेगा? बिहार के कुख्यात बाहुबली शहाबुद्दीन की ज़मानत पर पूरा देश बड़े ग़ुस्से में है. होना भी चाहिए. ऐसी बेशर्मी से क़ानून की धज्जियाँ उड़ें तो काहे का क़ानून और काहे की सरकार? माफ़िया-राजनीति-सत्ता [..] Read More

‘आप’ की झाड़ू, ‘आप’ पर!

अबकी चलेगी झाड़ू! दिल्ली में तो चली, ख़ूब चली, इतनी चली कि सारी की सारी पार्टियाँ साफ़ हो गयीं. कमाल की बात थी वह. आम आदमी पार्टी यानी 'आप' राजनीति की सफ़ाई करने का नारा लगा कर आयी थी. तो पार्टियों को तो साफ़ कर दिया उसने. लोगों को लगा कि बस अब राजनीति की [..] Read More
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Posted On  24th January 2015 2:21
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मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
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Posted On  27th August 2016 7:47
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Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है? लखनऊ में रविवार को राहुल-अखिलेश के साझा रोड शो के कुछ राजनीतिक सन्देश बड़े स्पष्ट हैं. एक, यह महज़ उत्तर प्रदेश का चुनावी गठबन्धन नहीं है, बल्कि 2019 का विपक्षी राजनीति का रोडमैप है. यानी गठबन्धन को लम्बा चलना है.

दो, दाँव पर सिर्फ़ एक चुनाव की [..] Read More
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