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Media

राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

Media in India,Politics and Mass Media, Ethics and Conduct of Journalists, Media Business, Journalism in Corporate age, Role of Editors in Newspapers and News Channels.

भारतीय मीडिया, राजनीति और संचार माध्यम, पत्रकारों का आचरण और नैतिक मूल्य, मीडिया कारोबार, कारपोरेट दौर में पत्रकारिता, समाचारपत्रों व न्यूज़ चैनलों में सम्पादक की भूमिका.

जिधर देखो, सब क्लीन ही क्लीन है!

न से नेता! जिसे कुछ नहीं होता! इसलिए राममूर्ति वर्मा को भी कुछ नहीं होगा! वह जानते हैं कि नेताओं का अकसर कुछ नहीं बिगड़ता. बाल भी बाँका नहीं होता! लालूप्रसाद यादव और जितेन्द्र तोमर जैसे अपवादों को छोड़ दीजिए. लालू जाने कैसे क़ानून के फंदे से निकल नहीं [..] Read More

इस ‘ड्रमेटिक्स’ से आगे देखिए!

देश में बहुत कुछ हो रहा है. मोदी सरकार के एक साल पूरे होने वाले हैं. बड़ी तीखी बहस हो रही है इस पर. सरकार ने एक साल में क्या किया? राहुल गाँधी नये जोश में दिख रहे हैं. वह ख़ुद तो नहीं, लेकिन उनका दफ़्तर ट्विटर पर आ चुका है! लोग पूछ रहे हैं कि राहुल तो काफ़ी [..] Read More

केजरीवाल, इंटरव्यू और सवाल

खीर टेढ़ी है! पत्रकार ने इंटरव्यू किया. बवंडर मचा है कि इंटरव्यू ईमानदार था कि बेईमान? लोग तय नहीं कर पा रहे हैं! यू ट्यूब पर लाखों लोग उस क्लिप को देख चुके हैं. पर आँखों देखा सच वही, जो देखनेवाले की आँख देखे या देखना चाहे! कुछ को दिखा कि यह इंटरव्यू [..] Read More
  
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क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
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मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
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तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
तीन तलाक़ और नयी सोशल इंजीनियरिंग तीन तलाक़ पर फ़ैसले के बाद क्या अब एक नयी सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत होगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या देश की राजनीति में हम एक नया मोड़ देखेंगे? ठीक वैसे ही जैसे मंडल के बाद दलित-पिछड़ा राजनीति के बिलकुल नये समीकरण देखे गये थे. हालाँकि पिछले तीन साल में [..] Read More
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