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Desh-Duniya

राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

News Analysis of Current Events in India and the World, Issues concerning with Secularism, Human Rights and Social Equality, Geo-Political issues like War against Terrorism and Religious Radicalism, Socio-Economic factors impacting and shaping world around us.

देश-विदेश की समसामियक घटनाओं व समाचारों का विश्लेषण, धर्मनिरपेक्षता, मानवाधिकार, सामाजिक बराबरी, भू-राजनीतिक मुद्दों जैसे आतंकवाद व धार्मिक चरमपंथ के विरुद्ध संघर्ष, व हमारे आसपास की दुनिया को प्रभावित करनेवाले सामाजिक-आर्थिक कारकों पर टिप्पणी.

चुपचाप ‘राष्ट्रवाद’ की धूप सेंकिए!

विकलांग हैं. खड़े नहीं हो सकते. तो फिर या तो सिनेमा देखने मत जाइए और अगर बहुत ही शौक़ हो, जाना ही हो तो साथ में बड़ा-सा साइनबोर्ड लेकर जाइए. सारी दुनिया को बताइए कि आप विकलांग हैं, इसलिए राष्ट्रगान के समय उठ कर खड़े नहीं हो सकते! वरना कोई पढ़ा-लिखा, [..] Read More

इतिहास की दो ‘केस स्टडी’!

अगर मुल्लाओं की चली होती तो पिछले डेढ़ सौ सालों में देश में न कोई मुसलमान बच्चा स्कूल गया होता, न कालेज और न यूनिवर्सिटी! आज न अलीगढ़ मुसलिम विश्विद्यालय होता और न ही हिन्दुस्तान के किसी मुसलमान ने 'अँगरेज़ ईसाइयों वाली' आधुनिक शिक्षा ली होती! ज़रा [..] Read More

काले धन पर गाल बजाते रहिए!

सरकार ने बड़ी मेहनत की. क़रीब सत्तर-पचहत्तर हज़ार करोड़ रुपये का काला धन बाहर आ गया है. सरकार ख़ुश. इतना बड़ा काम हुआ है, इससे पहले इतना बड़ा काला धन कभी बाहर नहीं आया था. देखिए न, मोदी जी ने चुनाव के पहले वादा किया था, तो काले धन पर भी उन्होंने आख़िर [..] Read More

29/9 के बाद पाकिस्तान

तो भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक मैच में नरेन्द्र मोदी ने पहला गोल कर दिया! और सिर्फ़ एक रात में खेल के सारे नियम बदल दिये. वह मैच जो बरसों से अनवरत एक ही ऊबाऊ, थकाऊ, पकाऊ तरीक़े से जारी था, सहसा उत्तेजक हो गया. लोगों को अचानक लगने लगा कि अरे, इस मैच में भी [..] Read More

कैसे सुलझे गुत्थी पाकिस्तान की?

फिर वही यक्ष प्रश्न! पाकिस्तान? उरी के बाद देश फिर ग़ुस्से में है. क्या इलाज है पाकिस्तान का? जवाब तो बहुत हैं. विशेषज्ञों के पास तो बड़े-बड़े समाधान हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की समस्या तो चुटकियों में हल की जा सकती है. लेकिन दिक़्क़त यह है कि यह [..] Read More

परोसिए नहीं, अब कलछुल दीजिए!

इधर आम्बेडकर नाम की लूट मची है, उधर 'मिलेनियम सिटी' गुड़गाँव के लोग अब गुरूग्राम में दंडवत होना सीख रहे हैं! देश में 'आम्बेडकर भक्ति' का क्या रंगारंग नज़ारा दिख रहा है! रंग-रंग की पार्टियाँ और ढंग-ढंग की पार्टियाँ, सब बताने में लगी हैं कि बाबासाहेब [..] Read More

सूखा बड़ा कि आइपीएल?

अक़्ल बड़ी कि भैंस? सूखा बड़ा कि आइपीएल? पहले सवाल पर तो देश में आम सहमति है. आज से नहीं, सदियों पहले से. दूसरा सवाल अभी कुछ दिन पहले ही उठा है. और देश इसका जवाब खोजने में जुटा है कि सूखा बड़ा है कि आइपीएल? लोगों को पीने के लिए, खाना बनाने के लिए, मवेशियों को [..] Read More

‘काली खेती’ का गोरखधन्धा!

अगर यह बात सच हो तो शायद यह UPA सरकार के दिनों का सबसे बड़ा घोटाला होगा! 'काली खेती' का घोटाला! लाखों अरब रुपये का घोटाला होगा यह. इतना बड़ा कि आप कल्पना तक न कर सकें! गिनतियों में उलझ कर दिमाग़ घनचक्कर हो जाये! छह सालों में यह छब्बीस करोड़ करोड़ रुपये का [..] Read More

ऐसे ही ‘टाइमपास’ होता रहे!

वह 'अच्छे वक़्त का राजा' है. सो 'अच्छे दिनों' की बहती बयार में उड़नछू हो गया! अब वह वहाँ मज़े से अपने 'अच्छे दिन' बितायेंगे. जैसे ललित मोदी बिता रहे हैं! सब पूछ रहे हैं, अरे ये कैसे हो गया? इतना माल गड़प कर माल्या जी कैसे उड़ गये? कैसे उड़ सकते हैं? यह भी कोई [..] Read More

‘भक्त’, ‘अभक्त’ और कन्हैया!

'भक्त' और 'अभक्त' में देश विभक्त है! और तप्त है! इक्कीस महीनों से इक्कीसवीं सदी के इस महाभारत का चक्रव्यूह रचा जा रहा था. अब जा कर युद्ध का बिगुल बजा. लेकिन चक्रव्यूह में इस बार अभिमन्यु नहीं, कन्हैया है. तब दरवाज़े सात थे, इस बार कितने हैं, कोई नहीं जानता! [..] Read More
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क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
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मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
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तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
क्या इस बजट में ग़रीबों को नक़द पैसा बाँटेगी सरकार? क्या मोदी सरकार ग़रीबों को नक़द पैसा बाँटनेवाली है? क्या बजट 2017 में सरकार वाक़ई यूनिवर्सल बेसिक इनकम की योजना लाने की तैयारी कर रही है कि हर ग़रीब को हर महीने या हर साल एक बँधी रक़म सरकार से मिलने लगे? मोदी सरकार के अगले बजट में ऐसा कोई धमाका हो सकता है, [..] Read More
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