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त्वरित टिप्पणियाँ

त्वरित टिप्पणी  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

पाकिस्तान: एक अटका हुआ सवाल

India-Pakistan Relations | पाकिस्तान एक अटका हुआ सवाल है. वह इतिहास की एक विचित्र गाँठ है. न खुलती है, न बाँधती है, न टूटती है, न जोड़ती है. रिश्तों का अजीब सफ़रनामा है यह! एक युद्ध, जो कहीं और कभी रुकता नहीं. एक युद्ध जो सरकारों के बीच है, और एक युद्ध जो जाने [..] Read More

मोदी के कौशल की पहली परीक्षा!

दिल्ली में नरेन्द्र मोदी के कौशल की पहली परीक्षा अब है! उनके राजनीतिक जीवन की शायद अब तक की सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने है! और शायद पहली भी! इस मामले में मोदी वाक़ई भाग्यशाली रहे हैं. मुझे नहीं याद पड़ता कि इससे पहले कभी उनके सामने कोई [..] Read More

‘लौहपुरुष’ को ज़ंग लगा कबाड़ क्यों बनाया?

कभी-कभी सोचता हूँ कि आडवाणी जी आजकल क्या सोचते होंगे? वह अतीत और यह वर्तमान! क्या किया और क्या पाया?

और अगर यात्रा के अन्त में यहीं पहुँचना था कि हार्डलाइन हिन्दुत्व के लौहपुरुष को ज़ंग लगा कबाड़ बना कर फेंक दिया जाये, तो देश की छाती चीर [..] Read More

संघ के दरबार में सरकार!

हाज़िर हो! सरकार हाज़िर हो! तो संघ के दरबार में सरकार की हाज़िरी लग गयी! पेशी हो गयी! एक-एक कर मंत्री भी पेश हो गये, प्रधानमंत्री भी पेश हो गये! रिपोर्टें पेश हो गयीं! सवाल हुए, जवाब हुए. पन्द्रह महीने में क्या काम हुआ, क्या नहीं हुआ, आगे क्या करना है, क्यों [..] Read More

सीबीआइ की पहली चुनौती है अक्षय का मामला

पत्रकार अक्षय सिंह की मौत कैसे हुई? क्या वह व्यापम घोटाले के किसी नये सच तक पहुँचने के क़रीब थे? क्या नम्रता दामोर की संदिग्ध मौत की पड़ताल करते-करते अक्षय इस घोटाले के किसी और सिरे तक पहुँचनेवाले थे? इन्दौर में कौन-कौन इस बात को जानता था कि अक्षय वहाँ [..] Read More

अनेक, नेक और कुछ बेनेक शुरुआतें!

'साल एक, शुरुआत अनेक'- और 'मोदी सरकार, विकास लगातार'-- अपनी पहली सालगिरह की मार्केटिंग मोदी सरकार इन नारों के साथ करनेवाली है! सरकार एक साल में अपनी तीन सौ उपलब्धियों की लम्बी-चौड़ी सूची भी पेश करने वाली है. 365 दिन और तीन सौ उपलब्धियाँ! औसतन हर दिन एक नयी [..] Read More

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क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
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मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग द...
Posted On  27th August 2016 7:47
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तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
क्यों राहुल-अखिलेश को यह साथ पसन्द है? लखनऊ में रविवार को राहुल-अखिलेश के साझा रोड शो के कुछ राजनीतिक सन्देश बड़े स्पष्ट हैं. एक, यह महज़ उत्तर प्रदेश का चुनावी गठबन्धन नहीं है, बल्कि 2019 का विपक्षी राजनीति का रोडमैप है. यानी गठबन्धन को लम्बा चलना है.

दो, दाँव पर सिर्फ़ एक चुनाव की [..] Read More
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