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Desh-Duniya

त्वरित टिप्पणी  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi

Top News or Major events in India and the World, Hot topics related to Human Rights and Social Equality, Geo-Political issues and problems such as War against Terrorism and Religious Radicalism, Socio-Economic factors impacting our world.

देश-दुनिया की महत्त्वपूर्ण समसामियक घटनाओं का विश्लेषण, मानवाधिकार, सामाजिक बराबरी व अन्य प्रमुख ज्वलंत मुद्दों पर समाचार-विश्लेषण, भू-राजनीतिक समस्याओं जैसे आतंकवाद व धार्मिक चरमपंथ के विरुद्ध संघर्ष, व विश्व को प्रभावित करनेवाले सामाजिक-आर्थिक कारकों पर टिप्पणी.

तीन तलाक़ : अबकी बार नहीं शाहबानो!

तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद अब बहुत कुछ बदलेगा. बदलना ही पड़ेगा. 1985 और 2017 में यही बहुत बड़ा फ़र्क़ है. 1985 के शाहबानो फ़ैसले को याद कीजिए. शाहबानो के साथ कौन था? बस गिनती के लोग! और मुसलमानों ने तब उस फ़ैसले का कैसा ज़बर्दस्त विरोध [..] Read More

नोटबंदी के एक माह बाद!

नोटबंदी में देश क़तारबंद है. आज एक महीना हो गया. बैंकों और एटीएम के सामने क़तारें बदस्तूर हैं. जहाँ लाइन न दिखे, समझ लीजिए कि वहाँ नक़दी नहीं है! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि बस पचास दिन की तकलीफ़ है. तीस दिन तो निकल गये. बीस दिन बाद क्या हालात [..] Read More

तीन तलाक़ की नाजायज़ ज़िद!

यह कामेडी है या ट्रेजेडी? या शायद एक साथ दोनों है! तीन तलाक़ पर मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हलफ़नामा कूढ़मग़ज़ी और नितान्त बचकाने तर्कों का एक शाहकार दस्तावेज़ है! कामेडी इसलिए कि इन तर्कों को पढ़ कर हँसी से लोटपोट हुआ जा सकता है और ट्रेजेडी इसलिए कि [..] Read More

मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!

मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग देश' के पाठकों को याद हो कि उसे मैंने लिखा था आज से बीस महीने पहले, पिछले साल जनवरी में! फिर बीस महीने बाद भाग- दो लिखने की ज़रूरत क्यों पड़ गयी? लाख टके का सवाल यही है. बस सारा मर्म यहीं है.

बीस महीने [..] Read More

पाकिस्तान: एक अटका हुआ सवाल

India-Pakistan Relations | पाकिस्तान एक अटका हुआ सवाल है. वह इतिहास की एक विचित्र गाँठ है. न खुलती है, न बाँधती है, न टूटती है, न जोड़ती है. रिश्तों का अजीब सफ़रनामा है यह! एक युद्ध, जो कहीं और कभी रुकता नहीं. एक युद्ध जो सरकारों के बीच है, और एक युद्ध जो जाने [..] Read More
  
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क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?
  तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब जारी होनेवाली है! ...
Posted On  24th January 2015 2:21
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Posted On  27th August 2016 7:47
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तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन?
बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ ल...
Posted On  12th November 2016 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
तीन तलाक़ और नयी सोशल इंजीनियरिंग तीन तलाक़ पर फ़ैसले के बाद क्या अब एक नयी सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत होगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या देश की राजनीति में हम एक नया मोड़ देखेंगे? ठीक वैसे ही जैसे मंडल के बाद दलित-पिछड़ा राजनीति के बिलकुल नये समीकरण देखे गये थे. हालाँकि पिछले तीन साल में [..] Read More
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