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Mar 01
न ड्रीम, न क्रीम बजट, बस बिज़नेस थीम बजट!
राग देश  | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
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--- क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
न ड्रीम बजट, न क्रीम बजट, यह 'ईज़ आफ़ डूइंग बिज़नेस' का थीम बजट है. वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कम से कम दस बार 'ईज़ आफ़ डूइंग बिज़नेस' की बात कही. और बजट भाषण के ठीक बाद अपने इंटरव्यू में जेटली ने कहा कि जब हम उद्योगों से कमाई करेंगे, तभी तो ग़रीब की मदद हो पायेगी. इसलिए बजट में अगर पंचायत राज की कोई चर्चा नहीं और गाँव, किसान और ग़रीब पर कोई ज़्यादा ज़ोर नहीं, तो कोई हैरानी की बात नहीं. बजट का पूरा फ़ोकस विदेशी और घरेलू निवेश बढ़ाने, इंफ़्रस्ट्रक्चर, टैक्स सुधारों, बाज़ार और बैंकिंग सुधारों, बैंकिंग का दायरा बढ़ाने और लघु उद्यमियों को बढ़ावा देने पर है, ताकि अगले कुछ वर्षों में औद्योगिक विकास की गति तेज़ी से बढ़ायी जाये. अगर Arun Jaitleyआप बजट की कुछ घोषणाओं को बारीकी से देखें, तो चीज़ें साफ़ होना शुरु हो जायेंगी. मिसाल के तौर पर कारपोरेट टैक्स को अन्तर्राष्ट्रीय पैमानों के अनुकूल बनाने की घोषणा ताकि विदेशी कम्पनियों की भारत में आने को लेकर हिचक ख़त्म हो. इसके लिए कर की दरें कम की जायेंगी और कर बचाने के लिए उपलब्ध कराये गये कुछ प्रावधान ख़त्म किये जायेंगे. कुल मिला कर करों की प्रक्रिया को सीधा और सरल बनाने की कोशिश है. सर्विस टैक्स बढ़ा कर 14% किया गया है, ताकि 2016 में जब जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज़ टैक्स) लागू किया जाये तो लोगों को अचानक बहुत ज़्यादा धक्का न लगे. जीएसटी में यह दर बढ़ कर 16% या उससे ज़्यादा भी हो सकती है. इसी तरह बैंकिंग सुधारों में कुछ बड़ी घोषणाएँ की गयी हैं. जहाँ सरकारी बैंकों का प्रबन्धन सुधारने के लिए एक स्वायत्त बैंक बोर्ड बनाने की घोषणा की गयी है, वहीं रिज़र्व बैंक के अधिकारों में कटौती कर उसे मुद्रा नीति और नियामक निगरानी तक ही सीमित करने का प्रस्ताव है. छोटे उद्यमियों को वित्तीय संसाधन मुहैया कराने के लिए 'मुद्रा बैंक' का प्रस्ताव है, ताकि अर्थव्यवस्था के विकास में उनकी भागीदारी बढ़ सके. डाक घरों को बैंकिंग उपकरणों में बदल कर बैंकिंग के दायरे को दूरदराज़ तक पहुँचाने का प्रस्ताव है. निवेश बढ़े और मध्यम वर्ग निवेश के लिए मजबूर हो, इसलिए आय कर में छूट देने के बजाय पेंशन फ़ंड में निवेश की सीमा पचास हज़ार रुपये और बढ़ा दी गयी. टैक्स बचाने के लिए मध्य वर्ग को इसकी शरण लेनी होगी और सरकारी ख़ज़ाने में आसानी से ज़्यादा पैसा आ जायेगा. किसानों के लिए एक राष्ट्रीय कृषि बाज़ार बनाने और राष्ट्रीय ग्रामीण कोष बनाने की बात कही गयी है. ग़रीबों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दुर्घटना बीमा, जीवन बीमा और पेंशन योजनाओं की घोषणा की गयी है. कुल मिला कर अर्थव्यवस्था के इंजन को निवेश, उद्योग, उत्पादन, बैंकिंग के ईंधन से चलाने की थीम को लेकर वित्त मंत्री चले हैं और अब तक की परम्परा से बिलकुल अलग रास्ता उन्होंने पकड़ा है. यही बजट की मुख्य थीम है और यही बजट की समझ भी GDP Growthहै कि जब उद्योग धन्धे बढ़ेंगे, उत्पादन बढ़ेगा, इंफ़्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा, अर्थव्यवस्था बढ़ेगी तो उसमें सबका विकास होगा, ग़रीबों का भी विकास होगा. इसीलिए मनरेगा जैसी कुछ बातों को छोड़ कर ग़रीबों के बारे में बजट ज़्यादा बात नहीं करता! पूरे बजट भाषण में मैंने केवल एक जगह एससी/एसटी शब्द का उल्लेख सुना, जब वित्तमंत्री ने मुद्रा बैंक की बात करते हुए कहा कि इससे छोटे उद्योग-धन्धे और सेवाएँ चलाने वालों को बड़ा फ़ायदा होगा, जिनमें साठ फ़ीसदी से ज़्यादा एससी/एसटी हैं, जिन्हें सहायता देने में प्राथमिकता दी जायेगी. एक जगह 'माइनारिटीज़' शब्द का भी उल्लेख आया, जब उन्होंने 'नयी मंज़िल' योजना की घोषणा की. अपने भाषण में जेटली ने क़रीब 60 बार 'इन्वेस्टमेंट' शब्द का उल्लेख किया, इससे अन्दाज़ लगाया जा सकता है कि बजट की दिशा क्या है. बहरहाल, बजट की सबसे अच्छी बात काले धन के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई का इरादा है. नक़द लेन-देन को हतोत्साहित करने और क्रेडिट व डेबिट कार्ड से लेनदेन को प्रोत्साहित करने की योजना और विदेशों में जमा सम्पत्ति छिपाने, कर चोरी करने और बेनामी सम्पत्ति रखने के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून लाने की घोषणा का स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन राजनीतिक दलों को मिलने वाले काले धन के चंदे पर सरकार की चुप्पी ज़रूर रहस्यमय है. बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव होनेवाले हैं और वहाँ बीजेपी की महत्त्वाकाँक्षाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं, तो अगर इन राज्यों के लिए बजट में विशेष सहायता का एलान हो, तो आश्चर्य कैसा? (लोकमत समाचार, 1 मार्च 2015)

अपडेट:

ग़रीबों के हिस्से में कटौती: चिदम्बरम

पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने इकानामिक टाइम्स में अपनी टिप्पणी में लिखा कि इस बजट में अमीरों को बहुत कुछ दिया गया है और ग़रीबों के हिस्से में कटौती कर दी गयी है. चिदम्बरम का कहना है कि अनुसूचित जाति और आदिवासियों के लिए चल रही योजनाओं में अच्छी-ख़ासी कटौती की गयी है. इसी तरह, पेयजल और सफ़ाई, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री रोज़गार योजना, बाल विकास कार्यक्रमों व अल्पसंख्यकों के लिए चलनेवाले विकास कार्यक्रमों के बजट में कटौती कर दी गयी है. --------------------

भारतीय मज़दूर संघ ने विरोध जताया

संघ परिवार के संगठन भारतीय मज़दूर संघ (बीएमएस) ने बजट पर 'गहरा असन्तोष' जताते हुए 2 मार्च को देश भर में विरोध-प्रदर्शन करने का एलान किया है. बीएमएस का कहना है कि एक ओर तो सरकार कारपोरेट टैक्स में कमी कर रही है और उसने अमीरों के लिए 'वेल्थ टैक्स' ख़त्म करने का एलान किया है, वहीं कर्मचारियों को आय कर में कोई राहत नहीं दी है. सरकार विदेशी कम्पनियों के लिए एफ़डीआइ में लगी सारी सीमाएँ ख़त्म करने की दिशा में काम कर रही है, और इन्फ़्रास्ट्रक्चर सेक्टर जैसे रेलवे व बन्दरगाह में निजी कम्पनियों की घुसपैठ के लिए पीपीपी माडल को बढ़ावा दे रही है, कई क्षेत्रों में निजीकरण को बढ़ाया दिया जा रहा है और तटवर्ती इलाक़ों में विदेशी कम्पनियों को पैर पसारने की अनुमति दे कर राष्ट्रीय सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया जा रहा है.
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मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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