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May 16
कहाँ होती है असली ख़बर?
 | क़मर वहीद नक़वी By: Qamar Waheed Naqvi
Comments: 1 

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एक पत्रकार में सबसे बड़ा गुण क्या होना चाहिए? बाक़ी बातें तो ठीक हैं कि विषय की समझ होनी चाहिए, ख़बर की पकड़ होनी चाहिए, भाषा का कौशल होना चाहिए आदि-आदि. लेकिन मुझे लगता है कि एक पत्रकार को निस्सन्देह एक सन्देहजीवी प्राणी होना चाहिए, उसके मन में निरन्तर सवाल उठते रहने चाहिए. जो चीज़ दिख रही है, वह तो दिख ही रही है, सबको दिख रही है, लेकिन जो चीज़ नहीं दिख रही है या 'नहीं दिखायी' जा रही है, वह क्या है? जो बात बतायी जा रही है, वह तो बतायी ही जा रही है, लेकिन जो बात 'नहीं बतायी' जा रही है, वह क्या है? और जो बात बतायी भी जा रही है, आख़िर वही बात क्यों बतायी जा रही है, उसके बताये जाने के पीछे क्या कारण है? और जो बात नहीं बतायी जा रही, उसके न बताये जाने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? कोई राजनेता बयान दे रहा है, वह ऐसा बयान क्यों दे रहा है? वह आज ही ऐसा बयान क्यों दे रहा है? और यह बयान उसी से क्यों दिलाया जा रहा है, किसी और से क्यों नहीं, इन सब बातों में कई बार समाचारों के बड़े गहरे अर्थ छिपे होते हैं, जिन्हें समझना और पकड़ना ज़रूरी होता है. आपके सामने जो बात लायी जाये, जो तथ्य रखे जायें, जो कहानी बतायी जाये, जो तर्क दिये जायें, उनमें से लगभग हरेक के पीछे कुछ ऐसा होता है, जिसे बताने वाला 'हाईलाइट' कर दिखाता/ बताता है, लेकिन उसमें कुछ ऐसा भी होता है, जिसे या तो बताया/ दिखाया नहीं जाता (अकसर जानबूझकर तो कभी-कभार अनजाने में भी), या छिपाया जाता है या छिपाने की कोशिश होती है या उससे कन्नी काटने की, टाल देने की चेष्टा होती है. बस असली ख़बर इसी के बीच होती है कि जो 'हाईलाइट' किया गया, वह क्यों किया गया और जिस तरफ़ ध्यान नहीं दिया गया या ध्यान नहीं जाने दिया गया, उसके पीछे बात क्या है? मुझे लगता है कि अच्छा पत्रकार बनने के लिए ज़रूरी है कि सन्देह का कीड़ा हमेशा मन के भीतर कुलबुलाता रहे. आजकल इसकी कुछ कमी-सी महसूस होती है. हम पत्रकार लोग अब सवाल करना भूल गये हैं!
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  • Fahim pathan

    qamar ji aapki baat sahi hai. humne apne bhitar aise hi patrakar ko jinda rakha hai. lekin sawalo ke jawab mil jane ke baad bhi patrakar us khabar ko publish kar bhi pata hai???

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स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
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