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case-of-yakub-memon-hanging-and-raging-debate-of-nationalism
याक़ूब मेमन को तो फाँसी हो चुकी. बहस जारी है. और शायद अभी यह बहस जारी रहे. बहुत-सारी बातें हो चुकी हैं. मज़हबी रंग की बातें हो चुकी हैं, राष्ट्रवादी जुमलों की तोपें चल चुकी हैं, ...
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corruption-in-indian-politics
क्या तमाशा है? इधर तमाशा, उधर तमाशा, यह तमाशा, वह तमाशा! और पूरा देश व्यस्त है तमाशों के बताशों में! तेरा तमाशा सही या उसका तमाशा सही? तेरी गाली, उसकी गाली, तेरी ताली, उसकी ताली, ...
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few-ideas-for-modi-independence-day-speech-2015
तो मोदी जी फिर तैयार हो रहे हैं. नहीं, नहीं, विदेश यात्रा के लिए नहीं! लाल क़िले से अपने दूसरे भाषण के लिए! क्या बोलना है, क्या कहना है? तैयारी हो रही है. सब मंत्रालयों से पूछा ...
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vyapam-scam-madhya-pradesh
सब तरफ़ व्यापम ही व्यापम है! वह व्यापक है, यहाँ, वहाँ, जहाँ नज़र डालो, वहाँ व्याप्त है! साहब, बीबी और सलाम, ले व्यापम के नाम, दे व्यापम के नाम! व्यापम देश में भ्रष्टाचार का नया ...
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madrasa-modernisation-and-ulema
मदरसे एक बार फिर विवादों में हैं! इस बार बवाल इस सवाल पर है कि मदरसे स्कूल हैं या नहीं? महाराष्ट्र सरकार ने फ़ैसला किया है कि वह उन मदरसों को स्कूल नहीं मानेगी, जहाँ अँगरेज़ी, ...
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emergency-namo-and-his-brand-of-liberal-democracy तोते वही बोलें, जो संघ बुलवाये!
लोकतंत्र सुरक्षित है! आडवाणी जी की बातों में बिलकुल न
Posted On  27th Jun 2015 9:28
madrasa-modernisation-and-ulema मदरसों को अब बदलना चाहिए
मदरसे एक बार फिर विवादों में हैं! इस बार बवाल इस सवाल पर है
Posted On  3rd Jul 2015 11:59
heatwave-in-india-and-apathy-towards-environment इस गरमी पर एक छोटा-सा सवाल!
लोग गरमी से मर रहे हैं. अब तक अठारह सौ से ज़्यादा लोग मर
Posted On  30th May 2015 8:21
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
विशेष
व्यापम की सीबीआइ जाँच
Posted On  20th May 2015 12:16  hrs
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद व्यापम घोटाले की जाँच सीबीआइ करेगी. सीबीआइ की पहली चुनौती है यह पता लगाना कि पत्रकार अक्षय सिंह की मौत कैसे हुई? इस सवाल का जवाब व्यापम के बहुत सारे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकता है. नीचे पढ़िए क़मर वहीद नक़वी का विश्लेषण.
त्वरित टिप्पणी
सीबीआइ की पहली चुनौती है अक्षय का मामला पत्रकार अक्षय सिंह की मौत कैसे हुई? क्या वह व्यापम घोटाले के किसी नये सच तक पहुँचने के क़रीब थे? क्या नम्रता दामोर की संदिग्ध मौत की पड़ताल करते-करते अक्षय इस घोटाले के किसी और सिरे तक पहुँचनेवाले थे? इन्दौर में कौन-कौन इस बात को जानता था कि अक्षय वहाँ [..] Read More
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