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dalit-politics-failed-to-end-dalit-discrimination-in-india
इधर आम्बेडकर नाम की लूट मची है, उधर 'मिलेनियम सिटी' गुड़गाँव के लोग अब गुरूग्राम में दंडवत होना सीख रहे हैं! देश में 'आम्बेडकर भक्ति' का क्या रंगारंग नज़ारा दिख रहा है! रंग-रंग ...
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ipl-water-crisis-and-drought-in-india
अक़्ल बड़ी कि भैंस? सूखा बड़ा कि आइपीएल? पहले सवाल पर तो देश में आम सहमति है. आज से नहीं, सदियों पहले से. दूसरा सवाल अभी कुछ दिन पहले ही उठा है. और देश इसका जवाब खोजने में जुटा है ...
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prashant-kishore-congress
ब्राह्मण शरणम् गच्छामि! सुना है कि 'वोट गुरू' प्रशान्त किशोर ने उत्तर प्रदेश के लिए काँग्रेस को यह नयी दीक्षा दी है. काँग्रेस उत्तर प्रदेश में 1989 से जो 'लापता' हुई, तो अब तक ...
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black-money-laundering-scam-through-agricultural-income
अगर यह बात सच हो तो शायद यह UPA सरकार के दिनों का सबसे बड़ा घोटाला होगा! 'काली खेती' का घोटाला! लाखों अरब रुपये का घोटाला होगा यह. इतना बड़ा कि आप कल्पना तक न कर सकें! गिनतियों में ...
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vijay-mallya-loan-default-and-the-story-of-timepass
वह 'अच्छे वक़्त का राजा' है. सो 'अच्छे दिनों' की बहती बयार में उड़नछू हो गया! अब वह वहाँ मज़े से अपने 'अच्छे दिन' बितायेंगे. जैसे ललित मोदी बिता रहे हैं! सब पूछ रहे हैं, अरे ये कैसे ...
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माल्दा एक सवाल है मुसलमानों के लिए! बेहद गम्भीर और बड़ा
Posted On  9th Jan 2016 1:00
india-and-uniform-civil-code कामन सिविल कोड से क्यों डरें?

जो बहस पचास-साठ साल पहले ख़त्म हो जानी चाहिए

Posted On  17th Oct 2015 12:35
genome-study-reveals-history-of-caste-system-in-india जाति रे जाति, तू कहाँ से आयी?
भारत में जाति कहाँ से आयी? किसकी देन है? बहस बड़ी पुरानी
Posted On  30th Jan 2016 12:10
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
क्यों याद आ रहे हैं आम्बेडकर? इतिहास के संग्रहालय से झाड़-पोंछ कर जब अचानक किसी महानायक की नुमाइश लगायी जाने लगे, तो समझिए कि राजनीति किसी दिलचस्प मोड़ पर है! इधर आम्बेडकर अचानक उस संघ की आँखों के तारे बन गये हैं, जिसका वह पूरे जीवन भर मुखर विरोध करते रहे, उधर जवाब में 'जय भीम' के साथ [..] Read More
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