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india-pakistan-conundrum
फिर वही यक्ष प्रश्न! पाकिस्तान? उरी के बाद देश फिर ग़ुस्से में है. क्या इलाज है पाकिस्तान का? जवाब तो बहुत हैं. विशेषज्ञों के पास तो बड़े-बड़े समाधान हैं. ऐसा लगता है कि ...
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criminals-in-politics-and-economic-development
सवाल तीखा है. मौज़ूँ है. सही है. लेकिन जवाब कहाँ से आयेगा? बिहार के कुख्यात बाहुबली शहाबुद्दीन की ज़मानत पर पूरा देश बड़े ग़ुस्से में है. होना भी चाहिए. ऐसी बेशर्मी से क़ानून ...
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aam-aadmi-party-in-troubled-waters
अबकी चलेगी झाड़ू! दिल्ली में तो चली, ख़ूब चली, इतनी चली कि सारी की सारी पार्टियाँ साफ़ हो गयीं. कमाल की बात थी वह. आम आदमी पार्टी यानी 'आप' राजनीति की सफ़ाई करने का नारा लगा कर ...
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religion-and-politics-debate
राजनीति का धर्म क्या है? संविधान का धर्म क्या है? देश की संसद का धर्म क्या है? विधानसभाओं का धर्म क्या है? न्यायपालिका का धर्म क्या है? बहस उठी है हरियाणा विधानसभा में जैन ...
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economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग देश' के पाठकों को याद हो कि उसे मैंने लिखा था आज से बीस महीने पहले, पिछले साल जनवरी में! फिर बीस महीने बाद भाग- दो लिखने की ...
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तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब
Posted On  24th Jan 2015 2:21
economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो!
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Posted On  27th Aug 2016 7:47
indian-muslims-malda-riots-and-few-questions माल्दा, मुसलमान और कुछ सवाल!
माल्दा एक सवाल है मुसलमानों के लिए! बेहद गम्भीर और बड़ा
Posted On  9th Jan 2016 1:00
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
तीन तलाक़ की नाजायज़ ज़िद! यह कामेडी है या ट्रेजेडी? या शायद एक साथ दोनों है! तीन तलाक़ पर मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हलफ़नामा कूढ़मग़ज़ी और नितान्त बचकाने तर्कों का एक शाहकार दस्तावेज़ है! कामेडी इसलिए कि इन तर्कों को पढ़ कर हँसी से लोटपोट हुआ जा सकता है और ट्रेजेडी इसलिए कि [..] Read More
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