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economic-backwardness-literacy-and-muslim-population-growth
मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग देश' के पाठकों को याद हो कि उसे मैंने लिखा था आज से बीस महीने पहले, पिछले साल जनवरी में! फिर बीस महीने बाद भाग- दो लिखने की ...
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नाचो, गाओ, ढोल बजाओ, जश्न मनाओ! बैडमिंटन में पी वी सिन्धु का शानदार कमाल! बेमिसाल. सोना नहीं जीत पायीं, लेकिन चाँदी भी कम नहीं. सिन्धु हारीं, तो अपने से कहीं बेहतर और दुनिया की ...
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इधर आम्बेडकर नाम की लूट मची है, उधर 'मिलेनियम सिटी' गुड़गाँव के लोग अब गुरूग्राम में दंडवत होना सीख रहे हैं! देश में 'आम्बेडकर भक्ति' का क्या रंगारंग नज़ारा दिख रहा है! रंग-रंग ...
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अक़्ल बड़ी कि भैंस? सूखा बड़ा कि आइपीएल? पहले सवाल पर तो देश में आम सहमति है. आज से नहीं, सदियों पहले से. दूसरा सवाल अभी कुछ दिन पहले ही उठा है. और देश इसका जवाब खोजने में जुटा है ...
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ब्राह्मण शरणम् गच्छामि! सुना है कि 'वोट गुरू' प्रशान्त किशोर ने उत्तर प्रदेश के लिए काँग्रेस को यह नयी दीक्षा दी है. काँग्रेस उत्तर प्रदेश में 1989 से जो 'लापता' हुई, तो अब तक ...
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तो साल भर से रुकी हुई वह रिपोर्ट अब
Posted On  24th Jan 2015 2:21
indian-muslims-malda-riots-and-few-questions माल्दा, मुसलमान और कुछ सवाल!
माल्दा एक सवाल है मुसलमानों के लिए! बेहद गम्भीर और बड़ा
Posted On  9th Jan 2016 1:00
india-and-uniform-civil-code कामन सिविल कोड से क्यों डरें?

जो बहस पचास-साठ साल पहले ख़त्म हो जानी चाहिए

Posted On  17th Oct 2015 12:35
मेरे बारे में….
स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही. Read more
त्वरित टिप्पणी
मुसलिम आबादी मिथ, भाग-दो! मुसलिम आबादी का मिथ - भाग दो! पहला भाग कब आया? शायद 'राग देश' के पाठकों को याद हो कि उसे मैंने लिखा था आज से बीस महीने पहले, पिछले साल जनवरी में! फिर बीस महीने बाद भाग- दो लिखने की ज़रूरत क्यों पड़ गयी? लाख टके का सवाल यही है. बस सारा मर्म यहीं है.

बीस महीने [..] Read More

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